टीआरपी डेस्क। भारत में कई ऐसे पौराणिक स्थान हैं जो आज भी वैज्ञानिकों के लिए पहेली बने हुए हैं। इन्हीं में से एक है झारखंड के गुमला जिले में स्थित टांगीनाथ धाम। मान्यता है कि यहां भगवान परशुराम का असली फरसा (टांगी) जमीन में गड़ा हुआ है, जिस पर हजारों साल बीत जाने के बाद भी आज तक जंग नहीं लगा है।

त्रेतायुग से जुड़ा है इस फरसे का नाता

बता दें कि इस मंदिर का इतिहास रामायण काल से जुड़ा हुआ है। स्थानीय मान्यताओं और मैदानी सूत्रों के अनुसार, जब भगवान राम ने शिव धनुष तोड़ा था, तब परशुराम अत्यंत क्रोधित होकर वहां पहुंचे थे। बाद में जब उन्हें पता चला कि राम स्वयं भगवान विष्णु के अवतार हैं, तो वे ग्लानि से भर गए। पश्चाताप करने के लिए वे इसी पहाड़ी पर आए और अपना फरसा जमीन में गाड़कर तपस्या में लीन हो गए।

लोहे का रहस्य: क्यों नहीं लगता जंग?

गौरतलब है कि यह फरसा खुले आसमान के नीचे धूप, बरसात और ठंड झेल रहा है, लेकिन इसमें जंग का एक कतरा भी नजर नहीं आता। दरअसल, स्थानीय लोग इसे भगवान का चमत्कार मानते हैं। बताया जाता है कि एक बार एक लुहार परिवार ने इस फरसे को चोरी करने या काटने की कोशिश की थी, लेकिन जैसे ही उन्होंने फरसे पर चोट की, उनके परिवार के लोग रहस्यमयी तरीके से अंधे होने लगे और अंततः उनकी मृत्यु हो गई। तब से कोई भी इस फरसे को छूने की हिम्मत नहीं करता।

See also  Horoscope 12 November 2023 : लक्ष्मी पूजा के दिन इन राशिफल वालों को किसी मित्र के सहयोग से आय में होगी वृद्धि, पढ़े अपना राशिफल

टांगीनाथ धाम की खास बातें

यह मंदिर झारखंड के गुमला जिले के डुमरी ब्लॉक में घने जंगलों के बीच एक पहाड़ी पर स्थित है। मंदिर परिसर में सैकड़ों प्राचीन शिवलिंग और कलाकृतियां बिखरी पड़ी हैं, जो इसे पुरातात्विक दृष्टि से भी खास बनाती हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि पहाड़ी पर आज भी भगवान परशुराम के पैरों के निशान मौजूद हैं।

खुदाई में मिले सोने-चांदी के सिक्के

कुछ साल पहले यहां की गई आंशिक खुदाई में भारी मात्रा में प्राचीन सोने और चांदी के सिक्के, और आभूषण मिले थे, जिन्हें जिला प्रशासन ने सुरक्षित रखवा दिया है। हालांकि, ग्रामीणों के डर और आस्था की वजह से सरकार ने यहां बड़े पैमाने पर खुदाई पर रोक लगा दी है।