टीआरपी डेस्क। देश के मौसम ने अप्रैल के विदा होते ही एक ऐसा यू-टर्न लिया है जिसने सबको हैरान कर दिया है। पूरा अप्रैल महीना भीषण गर्मी और लू की चपेट में बिताने के बाद, 30 अप्रैल की शाम से ही देश के बड़े हिस्से में मौसम का मिजाज बदल गया। उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक कहीं मूसलाधार बारिश हुई तो कहीं बड़े-बड़े ओले गिरे। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, यह बदलाव मात्र एक दिन की राहत नहीं है, बल्कि 1 मई से अगले 48 घंटे देश के कई राज्यों के लिए आफत बनकर आ सकते हैं।

मैदानी राज्यों में ऑरेंज और येलो अलर्ट

दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत के राज्यों में मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। यहां 60 से 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाएं तबाही मचा सकती हैं। उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड और पूर्वांचल में आकाशीय बिजली गिरने का खतरा बना हुआ है। राजस्थान के आठ जिलों में येलो अलर्ट है, जहां धूल भरी आंधी विजिबिलिटी कम कर सकती है। वहीं बिहार के 22 जिलों में प्रशासन ने लोगों को खुले मैदानों और पेड़ों के नीचे जाने से मना किया है क्योंकि वहां ओलावृष्टि और बिजली गिरने की घटनाएं पहले ही सामने आ चुकी हैं।

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पहाड़ों पर बर्फबारी और दक्षिण में प्री-मानसून का असर

हिमालयी राज्यों उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में पश्चिमी विक्षोभ के कारण न सिर्फ बारिश हो रही है, बल्कि ऊंचाई वाले इलाकों में भारी बर्फबारी ने सर्दी का अहसास करा दिया है। पहाड़ी रास्तों पर भूस्खलन की आशंका के चलते यात्रियों को सावधानी बरतने को कहा गया है। दूसरी तरफ, दक्षिण भारत के केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक में प्री-मानसून गतिविधियां तेज हो गई हैं, जिससे तटीय इलाकों में समुद्र उफान पर है और मछुआरों को चेतावनी जारी की गई है।

क्यों बिगड़ा मौसम का मिजाज?

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यह कोई सामान्य बदलाव नहीं है। एक साथ कई मौसमी सिस्टम सक्रिय हो गए हैं। उत्तर में पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय है, तो पूर्वोत्तर में साइक्लोनिक सर्कुलेशन दबाव बना रहा है। इन दोनों प्रणालियों के मिलने से मैदानी इलाकों में तेज आंधी और ओले गिरने जैसी स्थितियां पैदा हो रही हैं। हालांकि इससे पारा 3 से 5 डिग्री तक गिर गया है, लेकिन मौसम की यह अस्थिरता जनजीवन के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।

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किसानों के लिए चिंता और आम जनता को सलाह

यह समय किसानों के लिए सबसे संवेदनशील है। ओलावृष्टि और तेज बारिश तैयार फसलों को पूरी तरह बर्बाद कर सकती है। बागवानी करने वाले किसानों को भी भारी नुकसान की आशंका है। आम जनता के लिए सलाह है कि आंधी के दौरान खिड़की-दरवाजे बंद रखें, बिजली के उपकरणों का प्लग निकाल दें और खुले में खड़े वाहनों को सुरक्षित स्थान पर पार्क करें। यह ध्यान रहे कि यह बदलाव हीटवेव से केवल एक छोटा ब्रेक है, सिस्टम कमजोर होते ही गर्मी फिर से अपना असर दिखाएगी।