रायपुर। रायपुर के स्वास्थ्य महकमे में आज भारी हंगामा देखने को मिला। शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्रीकुमार शंकर मेनन की अगुवाई में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने स्वास्थ्य विभाग के CMHO दफ्तर का घेराव कर दिया। प्रदर्शन इतना उग्र था कि पुलिस की लगाई बैरिकेडिंग तक टूट गई और कांग्रेसी सीधे दफ्तर के प्रांगण में जा घुसे।
कांग्रेस का सीधा आरोप है कि प्रदेश की भाजपा सरकार में ‘हमर अस्पताल’ और सरकारी स्वास्थ्य केंद्र सिर्फ दिखावा बनकर रह गए हैं। अस्पतालों में न तो डॉक्टर हैं, न नर्सें और न ही जरूरी दवाइयां मिल रही हैं।
कागजों में चल रहे हैं अस्पताल, जमीन पर सन्नाटा
प्रदर्शन के दौरान श्रीकुमार शंकर मेनन ने तंज कसते हुए कहा कि साय सरकार में जनता को इलाज सिर्फ कागजों पर मिल रहा है। उन्होंने बताया कि कांग्रेस सरकार के समय 70 हमर अस्पताल की योजना बनी थी, जिसमें से 45 बिल्डिंगें बनकर तैयार हैं। लेकिन ढाई साल बीत जाने के बाद भी न वहां स्टाफ की भर्ती हुई और न ही अस्पताल शुरू हो पाए। हालात ये हैं कि गरीब मरीज मेकाहारा और डीकेएस के चक्कर काटते-काटते दम तोड़ रहे हैं।
प्राइवेट अस्पतालों की मनमानी और आयुष्मान कार्ड का सच
कांग्रेस ने आयुष्मान भारत योजना पर भी बड़े सवाल उठाए हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि केंद्र से पैसा समय पर नहीं आने की वजह से प्राइवेट अस्पताल अब मरीजों का इलाज करने से साफ मना कर देते हैं। ऐसे में गरीब आदमी अपनी उम्र भर की जमा पूंजी निजी अस्पतालों में लुटा रहा है। पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में सर्दी-खांसी की दवा तक नहीं मिल रही, जिससे जनता में भारी आक्रोश है।
खत्म की गईं योजनाएं, अब सिर्फ चहेतों को मिल रहा लाभ?
पूर्व विधायक कुलदीप जुनेजा ने आरोप लगाया कि पहले मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना में 25 लाख रुपये तक की मदद मिलती थी, लेकिन अब कई गंभीर बीमारियों को लिस्ट से हटा दिया गया है। कांग्रेसियों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग अब एक्सपायरी डेट वाली दवाइयां खरीदकर जनता की जान के साथ खिलवाड़ कर रहा है। साथ ही आरोप लगा कि अब सरकारी मदद सिर्फ भाजपा समर्थकों को ही मिल रही है, आम आदमी भटकने को मजबूर है।
मंत्री बंगले के घेराव की दी चेतावनी
करीब 3 घंटे तक चले इस उग्र प्रदर्शन के बाद कांग्रेस ने CMHO के माध्यम से सरकार को ज्ञापन सौंपा है। कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि अगर एक हफ्ते के भीतर अस्पतालों के हालात नहीं सुधरे, तो वे स्वास्थ्य मंत्री के बंगले का घेराव करेंगे। पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में हुए इस प्रदर्शन ने शहर की यातायात व्यवस्था को भी काफी देर तक प्रभावित किया।



