धार। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने धार की विवादित भोजशाला को लेकर एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने इस पूरे परिसर को राजा भोज के जमाने का वाग्देवी (मां सरस्वती) का मंदिर माना है। अदालत के इस आदेश के बाद अब हिंदू पक्ष को यहां नियमित पूजा-अर्चना करने का पूरा अधिकार मिल गया है। इस फैसले के बाद से ही पूरे इलाके के लोगों में भारी उत्साह देखने को मिला।

शनिवार सुबह का नजारा: गूंजा हनुमान चालीसा

अदालत का फैसला आने के बाद शनिवार सुबह धार में एक अलग ही नजारा था। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच सुबह-सुबह ही भारी संख्या में श्रद्धालु और विभिन्न हिंदू संगठनों के पदाधिकारी भोजशाला परिसर पहुंचे। माहौल पूरी तरह शांत और भक्तिमय रहा। लोगों ने परिसर के अंदर जाकर मां वाग्देवी के स्थान और पवित्र यज्ञ कुंड के सामने शीश नवाया और दंडवत प्रणाम किया।

इस मौके पर श्रद्धालुओं ने मिलकर हनुमान चालीसा का पाठ भी किया। सालों बाद बिना किसी रोक-टोक के पूजा करने की खुशी हर चेहरे पर साफ दिख रही थी।

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ASI का पुराना आदेश आंशिक रूप से रद्द

हिंदू पक्ष के जाने-माने वकील विष्णु शंकर जैन ने इस कानूनी जीत की बारीकियां साझा की हैं। उन्होंने बताया कि हाई कोर्ट ने साल 2003 के एएसआई (ASI) के उस पुराने आदेश को आंशिक रूप से रद्द कर दिया है, जिसके तहत मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार के दिन एक तय समय के लिए नमाज पढ़ने की इजाजत दी गई थी। कोर्ट के इस नए रुख के बाद अब कानूनी स्थिति बदल गई है। वहीं, एएसआई के वकील अविरल विकास खरे ने भी फैसले से जुड़े तकनीकी और कानूनी पहलुओं को मीडिया के सामने स्पष्ट किया है।

कण-कण चिल्लाकर कह रहा है यह मंदिर है

भोजशाला मुक्ति यज्ञ के संयोजक गोपाल शर्मा ने दर्शन के बाद भावुक होकर कहा कि भोजशाला का एक-एक पत्थर और इसका कण-कण गवाही देता है कि यह आदि काल से एक मंदिर ही है। मुस्लिम पक्ष के अगले कदम पर बात करते हुए उन्होंने साफ कहा कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट जाने का पूरा हक है, लेकिन सच कभी नहीं बदलेगा। भोजशाला मंदिर था, है और हमेशा रहेगा।

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सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल, लंदन से आएगी मूर्ति?

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हिंदू पक्ष ने पहले ही कमर कस ली है। मुस्लिम पक्ष के सुप्रीम कोर्ट जाने की संभावना को देखते हुए शीर्ष अदालत में दो कैविएट याचिकाएं दायर कर दी गई हैं। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि हिंदू पक्ष को सुने बिना अदालत कोई एकतरफा आदेश न दे।

इसके साथ ही एडवोकेट विष्णु शंकर जैन ने बताया कि हाई कोर्ट ने लंदन के म्यूजियम में रखी मां वाग्देवी की मूल मूर्ति को भारत वापस लाने की मांग पर भी सकारात्मक विचार किया है। फिलहाल, धार शहर और भोजशाला परिसर के चप्पे-चप्पे पर पुलिस प्रशासन की कड़ी नजर बनी हुई है।