टीआरपी डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसा फैसला सुनाया है जो बेटियों के हर माता-पिता की आंखें खोल देगा। कोर्ट ने पत्नी की हत्या के मामले में एक पति को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इस दौरान देश की सबसे बड़ी अदालत ने समाज की उस सोच पर कड़ा प्रहार किया, जहां लोकलाज के डर से बेटियों को प्रताड़ना के बाद भी ससुराल वापस भेज दिया जाता है।
जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए समाज के सामने एक बेहद तीखा सवाल रखा। कोर्ट ने पूछा, क्या युवा सोमा आचार्य की जान बचाई जा सकती थी? क्या सामाजिक बदनामी के डर की वजह से सोमा को भेड़ियों के हवाले कर दिया गया? यह सवाल हर उस परिवार के लिए है जो बेटी की शादी बचाने को ही अपनी सबसे बड़ी जिम्मेदारी मान बैठते हैं।
समाज की झूठी उम्मीद ने ले ली जान
यह पूरा मामला सोमा आचार्य नाम की महिला की मौत से जुड़ा है। सोमा ने बार-बार अपने माता-पिता को बताया था कि ससुराल में उसके साथ गंदा बर्ताव हो रहा है। वह अपनी जान बचाने के लिए कुछ दिन मायके आकर भी रही। लेकिन हर बार समाज के बड़े-बुजुर्गों ने बीच में आकर समझौता करा दिया।
समझौते के बाद सोमा को फिर से उसी नरक में भेज दिया गया। कोर्ट ने कहा कि घरवालों ने एक झूठी उम्मीद पाल रखी थी कि सब ठीक हो जाएगा। हालात ठीक तो नहीं हुए, बल्कि सोमा का दर्दनाक अंत हो गया।
फंदे पर लटकी मिली थी लाश
शादी के महज 15 महीने बाद ही सोमा का शव फंदे से लटका हुआ मिला था। पति ने कोर्ट में यह कहानी बनाने की कोशिश की कि उसने खुदकुशी की है। कोर्ट ने इस दलील को पूरी तरह खारिज कर दिया। मोटरसाइकिल, टीवी और अन्य सामानों के लिए सोमा को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था। माता-पिता ने बेटी का घर बचाने के लिए कुछ मांगें पूरी भी कर दी थीं। सोमा के शरीर पर चोट के ऐसे निशान थे जो खुदकुशी की थ्योरी को झूठा साबित करते हैं।
कोर्ट ने पकड़ा नकली फांसी का खेल
अदालत ने मेडिकल रिपोर्ट और सबूतों को देखकर साफ कहा कि यह मामला आत्महत्या का नहीं, बल्कि हत्या का है। मृतका के शरीर पर पाए गए जख्म खुद से नहीं लगाए जा सकते थे।
बेंच ने कहा कि मौत से ठीक पहले सोमा के साथ जमकर मारपीट और हिंसा की गई थी। इसके बाद मामले को आत्महत्या का रूप देने के लिए उसे फंदे पर लटकाया गया, जो कि एक नकली फांसी का मामला लगता है। कोर्ट ने साफ चेतावनी दी है कि बेटियों की शादी बचाने की माता-पिता की जरूरत से ज्यादा चिंता, कई महिलाओं को सीधे मौत के मुंह में धकेल रही है।



