रायपुर। छत्तीसगढ़ में मलाई खाकर रिटायर होने वाले दागी अफसरों की नींद उड़ने वाली है। राज्य सरकार ने एक ऐसा कड़ा आदेश जारी किया है, जिससे अब रिटायरमेंट के बाद भी भ्रष्ट अधिकारियों पर सीधे गाज गिरेगी। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने रायपुर से लेकर बस्तर और सरगुजा तक के सभी कप्तानों और कलेक्टर्स को फरमान भेज दिया है।
क्यों पड़ी इस कड़े आदेश की जरूरत?
रायपुर के मंत्रालय से लेकर जिला दफ्तरों तक कई ऐसे मामले सामने आ रहे थे, जहां जांच के दौरान ही साहब लोग रिटायर हो जाते थे। इसके बाद टेक्निकल पेंच फंसाकर केस को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता था। छत्तीसगढ़ लोक आयोग ने इस चालाकी को पकड़ लिया। आयोग ने सरकार को साफ कहा कि इससे भ्रष्टाचार और कुप्रशासन को बढ़ावा मिल रहा है।
लोक आयोग की चिंता और नियमों का पेंच
अक्सर विभाग यह कहकर फाइल बंद कर देते थे कि छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (पेंशन) नियम 1976 के तहत रिटायरमेंट से 4 साल पुरानी घटनाओं पर जांच नहीं हो सकती। इससे सरकारी खजाने को चूना लगाने वाले बच निकलते थे। अब लोक आयोग के सुझाव पर सरकार ने साफ कर दिया है कि नियम 8, 9 और 65 के तहत राज्यपाल को दागी कर्मियों की पेंशन रोकने और सरकारी धन की वसूली करने का पूरा हक है।
अब सीधे राज्यपाल से मिलेगी हरी झंडी
नया आदेश आने के बाद अब भ्रष्ट अफसरों की खैर नहीं होगी। रायपुर घड़ी चौक के प्रशासनिक गलियारों में भी इसकी चर्चा तेज है। नए नियम के तहत अब इन कड़े कदमों से कार्रवाई होगी गंभीर वित्तीय गड़बड़ी करने वालों की पेंशन तुरंत रोकने के लिए सीधे राज्यपाल से अनुमति ली जाएगी। सरकारी धन का दुरुपयोग करने वालों से नियम 65 के तहत पाई-पाई वसूली जाएगी। राज्य के सभी विभागों, संभाग आयुक्तों, एसपी और कलेक्टर्स को लोक आयोग के निर्देशों का सख्ती से पालन करने को कहा गया है। अब देखना होगा कि इस नए हंटर के बाद छत्तीसगढ़ के कितने दागी अफसरों पर शिकंजा कसता है।



