नई दिल्ली। अलग-अलग इमरजेंसी नंबरों की उलझन अब खत्म होगी। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि पूरे देश में आपातकालीन सेवाओं के लिए सिर्फ एक हेल्पलाइन नंबर ‘112’ संचालित किया जाए। कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को 3 महीने में इसे पूरी तरह लागू करने को कहा है।

अभी हैं 6 से ज्यादा नंबर: 100, 101, 102, 108, 1033, 1091

अभी पुलिस के लिए 100, फायर के लिए 101, एम्बुलेंस के लिए 102/108, महिला हेल्पलाइन 1091, रोड एक्सीडेंट के लिए 1033 जैसे अलग-अलग नंबर हैं। इससे आपात स्थिति में भ्रम और देरी होती थी। अब इन सभी को मर्ज कर सिर्फ 112 रहेगा।

ट्रॉमा केयर = जीने का अधिकार: SC

‘सेव लाइफ फाउंडेशन’ की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस ए.एस. चंदूरकर की पीठ ने कहा कि आपात स्थिति में तत्काल मदद जीवनरक्षक दवा की तरह है। ट्रॉमा उपचार का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले जीवन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है।

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‘गुड समैरिटन’ सिस्टम भी बनेगा

कोर्ट ने राज्यों को प्रभावी ‘गुड समैरिटन’ शिकायत निवारण प्रणाली बनाने का भी निर्देश दिया, ताकि मदद करने वाले राहगीरों को पुलिस-कोर्ट के चक्कर न काटने पड़ें। अक्सर लोग कानूनी प्रक्रियाओं के डर से दुर्घटना पीड़ितों की मदद से हिचकते हैं। कोर्ट ने कहा कि हर मिनट जीवित रहने की संभावना घटाता है, इसलिए तेजी जरूरी है।

मासिक रिपोर्ट और पोर्टल पर जानकारी

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को नियमित अनुपालन रिपोर्ट देने, मासिक बैठकें करने और उनकी कार्यवाही संबंधित पोर्टलों पर अपलोड करने का भी निर्देश दिया है।