टीआरपी डेस्क: देश के स्वास्थ्य और सामाजिक हालातों को बयां करने वाली नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-6) की ताजा रिपोर्ट जारी हो गई है। इस नई रिपोर्ट में कुछ मोर्चों पर राहत की खबर है, तो कुछ आंकड़ों ने चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश में घरेलू हिंसा (domestic violence) और बाल विवाह के मामलों में कमी आई है, लेकिन महिलाओं में मोटापे की समस्या तेजी से बढ़ी है।

बाल विवाह और घरेलू हिंसा में सुधार, बिहार में सबसे खराब स्थिति

सर्वे के अनुसार, देश में घरेलू हिंसा की दर 29.2% से घटकर 22.3% पर आ गई है। वहीं, बाल विवाह (child marriage) का आंकड़ा भी 23.3% से गिरकर 20.1% रह गया है।

अगर राज्यों की बात करें, तो केरल में बाल विवाह के सबसे कम (2.9%) मामले हैं, जबकि पश्चिम बंगाल (36.4%) और बिहार (34.6%) इस लिस्ट में सबसे ऊपर हैं। वैवाहिक हिंसा (marital violence) के मामले में हिमाचल प्रदेश सबसे सुरक्षित राज्य है, जबकि बिहार में स्थिति सबसे खराब है, जहां 36.1% महिलाओं को हिंसा का सामना करना पड़ता है।

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महिलाओं में बढ़ा मोटापा, सिजेरियन डिलीवरी का रिकॉर्ड

रिपोर्ट के मुताबिक, महिलाओं में मोटापा (obesity in women) साल 2019-21 के मुकाबले 7% बढ़ गया है। आंध्र प्रदेश और सिक्किम की 48% महिलाएं मोटापे की शिकार हैं। इसके अलावा, एक चौंकाने वाला आंकड़ा यह है कि निजी अस्पतालों में सिजेरियन डिलीवरी (C-section delivery) 54.1% के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। वहीं, शुरुआती 6 महीनों तक शिशुओं को केवल स्तनपान (exclusive breastfeeding) कराने की दर 63.7% से गिरकर 55.8% पर आ गई है।

महिलाएं हो रहीं आत्मनिर्भर

इस सर्वे में कुछ बेहद सकारात्मक बदलाव भी दिखे हैं। कामकाजी महिलाओं (working women) का आंकड़ा 25.4% से बढ़कर 30.8% हो गया है। महिलाओं में इंटरनेट का उपयोग (internet usage) दोगुना होकर 64.3% पर पहुंच गया है। इसके अलावा, देश के 18.8% परिवारों में महिलाओं के पास मकान या जमीन का मालिकाना हक (land ownership) है। राहत की बात यह भी है कि कुपोषित बच्चों में नाटेपन (stunting in children) का आंकड़ा 35.5% से घटकर 29.3% रह गया है।

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