टीआरपी डेस्क। छत्तीसगढ़ के सरगुजा से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर आ रही है। सीतापुर के बीजेपी विधायक रामकुमार टोप्पो और उनके साथियों पर तहसीलदार के साथ मारपीट करने का गंभीर केस दर्ज हुआ है। शनिवार को पीड़ित नायब तहसीलदार ने सरेआम मंच से विधायक पर कई बड़े आरोप जड़ दिए। इस घटना के बाद से पूरे सरगुजा इलाके में सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है।

जेल में बंद जीजा को छुड़ाने का था भारी दबाव

पीड़ित नायब तहसीलदार ने खुले मंच से अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि विधायक के जीजा हत्या के एक मामले में पिछले 10 से 15 साल से जेल में बंद हैं। विधायक रामकुमार टोप्पो उन्हें गलत तरीके से पैरोल पर बाहर निकालने के लिए कागजों पर दस्तखत करने का दबाव बना रहे थे। अधिकारी ने कहा कि जब पैरोल से जुड़े जरूरी पेपर वर्क ही पूरे नहीं थे, तो वह बिना जांच किए कैसे साइन कर देते? बस इसी बात को लेकर सारा विवाद शुरू हुआ।

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पिटाई का वीडियो क्यों कराया गया डिलीट?

तहसीलदार ने पुलिस की जांच पर भी बड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि अगर विधायक सचमुच पाक-साफ हैं, तो मौके पर मौजूद लोगों के मोबाइल से मारपीट का वीडियो क्यों डिलीट कराया गया? कई लोगों ने इस पूरी घटना का वीडियो बनाया था। अब कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ ने इस मामले में आईजी (IG) को ज्ञापन सौंपकर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। अफसरों का कहना है कि इस माहौल में निष्पक्ष जांच होना बहुत मुश्किल लगता है।

कल गिरफ्तारी देने निकले थे विधायक, समर्थकों ने रोका

इस हाई-प्रोफाइल मामले में कल यानी शुक्रवार को अंबिकापुर में हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। विधायक रामकुमार टोप्पो अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ गिरफ्तारी देने के लिए निकले थे। लेकिन जयस्तंभ चौक के पास समर्थकों ने जमकर हंगामा कर दिया, जिसके चलते विधायक को बिना गिरफ्तारी दिए ही वापस सीतापुर लौटना पड़ा। हालांकि, विधायक ने साफ किया है कि वह बहुत जल्द गोपनीय तरीके से सरगुजा पुलिस के सामने सरेंडर करेंगे।

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आखिर किस बात पर शुरू हुआ था पूरा विवाद?

सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे फसाद की शुरुआत तहसीलदार दफ्तर से हुई थी। विधायक की बहन किसी काम से नायब तहसीलदार के चैंबर में गई थीं। वहां किसी बात को लेकर दोनों के बीच तीखी बहस हो गई। आरोप है कि बहस के दौरान अधिकारी ने सरकारी फाइल फेंक दी और महिला को दफ्तर से बाहर जाने को कह दिया। इस बात की खबर जैसे ही विधायक समर्थकों को लगी, वे दफ्तर में घुस गए और दोनों पक्षों के बीच जमकर लात-घूंसे चले। अब दोनों तरफ से पुलिस थाने में केस दर्ज कराया गया है।