टीआरपी डेस्क। केंद्र सरकार पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने की बहुत बड़ी तैयारी में है। दिल्ली से आ रही खबरों के मुताबिक, इसके लिए बनी संयुक्त संसदीय समिति एक खास टू-फेज ट्रांजिशन मॉडल पर काम कर रही है।

इसके तहत देश को एक साथ चुनावी मोड में लाने के लिए दो चरणों में काम होगा। इसके लिए साल 2029 और 2034 का टारगेट तय किया जा रहा है। रायपुर के राजनीतिक गलियारों में भी इस नए फॉर्मूले को लेकर चर्चाएं बेहद तेज हो गई हैं।

इस नए प्लान के तहत साल 2029 के लोकसभा चुनाव के साथ ही देश के करीब 20 राज्यों में विधानसभा चुनाव करा दिए जाएंगे। सूत्रों की मानें तो जेपीसी का कार्यकाल साल 2026 के मानसून सत्र तक के लिए बढ़ा दिया गया है। ऐसे में कानून बनने की प्रक्रिया जल्द ही रफ्तार पकड़ेगी। साल 2034 आते-आते पूरे देश में सिर्फ एक ही बार वोटिंग कराने का लक्ष्य रखा गया है। छत्तीसगढ़ में पिछला विधानसभा चुनाव साल 2023 के अंत में हुआ था, वहीं 2028 में विधानसभा चुनाव होने हैं ऐसे में इस नए नियम से यहां के सियासी समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।

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क्यों पड़ी इसकी जरूरत?

भारत में यह कोई पहली बार नहीं हो रहा है। साल 1952 से लेकर 1967 तक देश में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ ही होते थे। लेकिन इसके बाद राज्यों में सरकारें गिरने लगीं और कई विधानसभाएं समय से पहले ही भंग हो गई। साल 1970 में लोकसभा भी समय से पहले भंग हो गई और तब से यह पूरा सिस्टम बिखर गया। अब सरकार इसी पुराने ढर्रे को वापस लाकर देश का पैसा और समय बचाना चाहती है।

रामनाथ कोविंद पैनल की रिपोर्ट से बढ़ा आगे

इस पूरे मामले पर विचार करने के लिए पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अगुवाई में 2 सितंबर 2023 को एक बड़ा पैनल बनाया गया था। इस पैनल ने देश के बड़े-बड़े एक्सपर्ट्स से बात की। करीब 191 दिनों की लंबी रिसर्च के बाद 14 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। इसी रिपोर्ट के आधार पर अब जेपीसी आगे का रास्ता तैयार कर रही है ताकि किसी भी राज्य की विधानसभा का कार्यकाल जबरदस्ती छोटा न करना पड़े।

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