INDIA alliance meeting: नई दिल्ली। विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लाक (Indian National Developmental Inclusive Alliance) की महत्वपूर्ण बैठक सोमवार 8 जून को दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित होगी। यह बैठक हालिया विधानसभा चुनावों के बाद गठबंधन की पहली बड़ी बैठक मानी जा रही है, ऐसे समय में जब कई सहयोगी दलों के बीच मतभेद भी सामने आए हैं।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बताया कि बैठक में 23 राजनीतिक दलों ने भाग लेने की पुष्टि की है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा, ‘भारत की तरह INDIA जनबंधन भी अपनी विविधता के साथ एकजुट है।
INDIA alliance meeting: ममता बनर्जी दिल्ली पहुंचीं
तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने बैठक को लेकर मजबूत समर्थन जताया है। पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी रविवार को दिल्ली पहुंचीं। TMC सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि सभी दल साझा उद्देश्य और स्पष्ट इरादे के साथ बैठक में शामिल हो रहे हैं।
बैठक में ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी, उद्धव ठाकरे, अखिलेश यादव, राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे समेत कई बड़े नेता शामिल हो सकते हैं।
INDIA alliance meeting: बैठक से DMK और AAP रह सकते हैं दूर
बैठक से पहले गठबंधन के भीतर मतभेद भी खुलकर सामने आए हैं। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के बैठक में शामिल होने की संभावना कम है। DMK ने तमिलनाडु में कांग्रेस पर ‘विश्वासघात’ का आरोप लगाया है।
वहीं आम आदमी पार्टी (AAP) के भी बैठक में शामिल न होने की खबर है। वहीं केरल चुनाव के दौरान कांग्रेस नेताओं द्वारा CPI(M) पर भाजपा से सांठगांठ के आरोप लगाए जाने के बाद दोनों दलों के बीच तनाव बढ़ा है।
CPI(M) महासचिव एम ए बेबी ने कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे को पत्र लिखकर इन आरोपों पर स्पष्टीकरण मांगा है। इसके बावजूद CPI(M) ने बैठक में शामिल होने का फैसला किया है। पार्टी की ओर से राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास प्रतिनिधित्व करेंगे और माना जा रहा है कि वह यह मुद्दा बैठक में उठा सकते हैं।
INDIA alliance meeting: किन मुद्दों पर होगी चर्चा
हालांकि बैठक का आधिकारिक एजेंडा जारी नहीं किया गया है, लेकिन माना जा रहा है कि कई राष्ट्रीय और राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा होगी।
कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि वह लोगों के वोट के अधिकार को कमजोर कर रही है। संविधान पर लगातार हमला कर रही है। विपक्षी नेताओं पर जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है। महंगाई और बेरोजगारी बढ़ा रही है और विदेश नीति में राष्ट्रीय हितों से समझौता कर रही है। इन मुद्दों पर विपक्षी दल साझा रणनीति बना सकते हैं।



