नई दिल्ली/कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस (TMC) को सोमवार के दिन दिल्ली और पश्चिम बंगाल दोनों ही मोर्चों पर बहुत बड़ा झटका लगा है। एक तरफ पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी दिल्ली में विपक्षी गठबंधन की एक अहम बैठक में हिस्सा ले रही थीं। ठीक उसी समय उनकी पार्टी के सबसे वरिष्ठ राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय ने संसद और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। सुखेंदु शेखर राय इस वक्त देश की राजधानी दिल्ली में ही मौजूद हैं। उन्होंने सोमवार को सीधे देश के उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति से मुलाकात की। उन्होंने सभापति को संसद के उच्च सदन की सदस्यता से अपना त्यागपत्र सौंप दिया। इसके तुरंत बाद उन्होंने ईमेल के जरिए पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी को टीएमसी से भी अपने इस्तीफे की कॉपी भेज दी।
जनता के ऐतिहासिक फैसले का हवाला देकर पार्टी पर उठाए गंभीर सवाल
सुखेंदु शेखर राय ने राज्यसभा और पार्टी से दिए अपने इस्तीफे में बंगाल चुनाव के नतीजों का खुलकर जिक्र किया है। उन्होंने अपनी चिट्ठी में साफ लिखा कि हाल ही में हुए चुनावों में बंगाल के वोटर्स ने पिछले 15 सालों से सत्ता में रही टीएमसी सरकार पर पूरी तरह अविश्वास जताया है। मतदाताओं ने पार्टी के भीतर फैले भारी भ्रष्टाचार, महिलाओं पर हुए दमन और शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, रोजगार समेत कानून व्यवस्था की बदहाली को पूरी तरह नकार दिया। इसी का नतीजा है कि जनता ने बंगाल के इतिहास में पहली बार भाजपा (BJP) को भारी बहुमत देकर जिताया है। उन्होंने आगे लिखा कि नई सरकार ने अपने घोषणापत्र के हिसाब से बंगाल के विकास और पुनर्निर्माण का काम शुरू कर दिया है। मैं जनता के इस ऐतिहासिक फैसले का सम्मान करते हुए इस्तीफा दे रहा हूं।
विपक्षी बैठक के बीच पूरी तरह बैकफुट पर आई तृणमूल कांग्रेस
सुखेंदु शेखर राय के इस्तीफे के समय ने तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को दिल्ली में पूरी तरह असहज कर दिया है। सोमवार को ही दिल्ली में विपक्षी इंडिया ब्लॉक (India Block) की एक बड़ी बैठक चल रही थी। इस बैठक में ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष को एकजुट करने का मोर्चा संभालने पहुंचे थे। ठीक उसी मौके पर उनकी खुद की पार्टी के इतने बड़े चेहरे ने साथ छोड़ दिया। टीएमसी की तरफ से अभी तक इस इस्तीफे पर कोई भी आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इससे पहले भी बंगाल में टीएमसी के कई विधायकों ने बगावत का रास्ता चुना था। आपको बता दें कि कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज (RG Kar Medical College) की दुखद घटना के समय भी सुखेंदु शेखर ने अपनी ही सरकार और पुलिस प्रशासन के ढुलमुल रवैये पर कड़े सवाल उठाए थे।



