टीआरपी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में राज्य की बहुप्रतीक्षित सीएम हेल्पलाइन 1076 का बटन दबाकर आधिकारिक शुभारंभ किया। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने जनसामान्य की शिकायतों के त्वरित और समयबद्ध निवारण के लिए इस हेल्पलाइन प्रणाली के आधिकारिक लोगो (Logo) का भी विमोचन किया।
यह कदम छत्तीसगढ़ में डिजिटल गवर्नेंस और सुशासन की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। अब राज्य के दूरदराज गांवों में रहने वाले आम नागरिकों को अपनी छोटी-बड़ी समस्याओं की शिकायत के लिए जिला मुख्यालयों या राजधानी के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, बल्कि वे घर बैठे एक फोन कॉल या व्हाट्सऐप के जरिए सीधे सरकार तक अपनी बात पहुंचा सकेंगे।
42 विभागों के 8 हजार अधिकारी संभालेंगे मोर्चा
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बताया कि यह हेल्पलाइन प्रणाली 24 घंटे और सप्ताह के सातों दिन (24×7) तीन शिफ्टों में काम करेगी। इस महा-अभियान में राज्य शासन के 42 विभागों के लगभग 8 हजार अधिकारियों को जोड़ा गया है, जो 1195 श्रेणियों में आने वाली शिकायतों का एक निश्चित समय-सीमा के भीतर निराकरण सुनिश्चित करेंगे। आधुनिक तकनीकी को अपनाते हुए इस हेल्पलाइन को व्हाट्सऐप प्लेटफॉर्म से भी जोड़ा गया है।
इस व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए हर शिकायत को एक यूनिक आईडी दी जाएगी, जिससे शिकायतकर्ता अपनी शिकायत का स्टेटस ऑनलाइन ट्रैक कर सकेंगे। यदि कोई नागरिक मिले समाधान से संतुष्ट नहीं होता है, तो उसकी शिकायत स्वतः ही उच्च अधिकारियों के पास समीक्षा के लिए ट्रांसफर हो जाएगी। इस पूरी प्रणाली की मॉनिटरिंग मुख्यमंत्री सचिवालय और सचिव स्तर के अधिकारी डैशबोर्ड के जरिए करेंगे।
लॉन्चिंग के इस गरिमामयी अवसर पर उपमुख्यमंत्री अरुण साव एवं विजय शर्मा, मंत्रिमंडल के सदस्यगण, मुख्य सचिव विकासशील, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, पी. दयानंद और रजत बंसल सहित कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।
जनता की समस्याओं के समाधान के लिए टोल फ्री नंबर 1076 जारी किया गया है, जो चौबीसों घंटे चालू रहेगा।
इस पारदर्शी सिस्टम से 42 विभागों के 8,000 अधिकारी जुड़े हैं, जो 1195 श्रेणियों की समस्याओं का समयबद्ध निपटारा करेंगे।
सीएम हेल्पलाइन 1076 के लागू होने के बाद अब जमीनी स्तर पर अधिकारियों की जवाबदेही काफी बढ़ जाएगी। आने वाले दिनों में जनता से मिलने वाले फीडबैक और शिकायतों के आंकड़ों के आधार पर सरकार को अपनी योजनाओं की कमियों को सुधारने और नई नीतियां बनाने में सीधे मदद मिलेगी।



