रायपुर। छत्तीसगढ़ के युवाओं और मेडिकल की पढ़ाई करने का सपना देख रहे छात्रों के लिए एक बेहद बुरी खबर सामने आ रही है। राज्य में इस साल खुलने जा रहे 5 नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों पर नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने पूरी तरह से ब्रेक लगा दिया है। एनएमसी से हरी झंडी नहीं मिलने के कारण अब इस सत्र में ये कॉलेज नहीं खुल पाएंगे। इस पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग के बड़े अफसरों की एक ऐसी गंभीर लापरवाही उजागर हुई है, जिसने पूरे प्रदेश को शर्मिंदा कर दिया है।
बिना बिल्डिंग और अस्पताल के ही मांग रहे थे परमिशन
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार राज्य सरकार ने मनेंद्रगढ़, कवर्धा, गीदम (दंतेवाड़ा), जांजगीर और कुनकुरी में नए मेडिकल कॉलेज खोलने का बड़ा फैसला किया था। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश भी दिए गए थे कि वे एनएमसी के तय मापदंडों के अनुसार सारी तैयारियां पूरी कर लें। लेकिन अफसरों ने इस काम को कतई गंभीरता से नहीं लिया।
हैरत की बात ये है कि खुद स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले मनेंद्रगढ़ में न तो अस्पताल की ढंग की व्यवस्था है और न ही कॉलेज की बिल्डिंग खड़ी हुई है। इसके बावजूद अफसरों ने कागजों पर ही कॉलेज खोलने की फाइल आगे बढ़ा दी।
सैटेलाइट ने खोल दी पोल
बताया जा रहा है कि स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी इस मुगालते में थे कि केंद्र और राज्य में एक ही दल की सरकार है, तो डबल इंजन के रसूख पर एनएमसी आंख बंद करके परमिशन दे देगा। इसी ओवरकॉन्फिडेंस में बिना कॉलेज और अस्पताल भवन बने ही प्रस्ताव दिल्ली भेज दिया गया।
एनएमसी के सख्त नियमों के मुताबिक, कॉलेज की खुद की चालू बिल्डिंग होना अनिवार्य है ताकि बच्चे वहां बैठकर पढ़ाई कर सकें। मगर इन इन 5 प्रस्तावित जगहों में से किसी भी जगह पर कॉलेज का भवन बनकर तैयार ही नहीं हुआ था। हद तो तब हो गई जब 5 में से 2 जगहों पर जिला अस्पताल तक मौजूद नहीं था, और अफसरों ने केवल कम्युनिटी हेल्थ सेंटर (CHC) को बड़ा अस्पताल दिखाकर अनुमति मांगी थी।
एनएमसी के अफसरों ने दिल्ली में बैठकर छत्तीसगढ़ का दौरा किए बिना ही सीधे सैटेलाइट इमेजिंग के जरिए प्रस्तावित जमीनों की जांच कर ली। ऊपर से ली गई तस्वीरों में जब सिर्फ खाली मैदान और अधूरी कंक्रीट दिखी, तो कमीशन ने बिना देर किए राज्य सरकार के प्रस्ताव को सीधे खारिज कर दिया।
2 साल तक टेंडर का खेल चलता रहा
इस पूरे मामले के पीछे केवल लापरवाही नहीं, बल्कि टेंडर का एक बड़ा खेल भी सामने आ रहा है। सूत्रों की मानें तो इनमें से तीन मेडिकल कॉलेजों के लिए पिछली सरकार के समय ही केंद्र सरकार से पर्याप्त बजट आ चुका था। लेकिन विभाग विभाग द्वारा लेटलतीफी के कारण भवन, शिक्षकों की भर्ती, डीन और सुप्रीटेंडेंट की भर्ती नहीं की जा सकी साथ ही आवश्यक उपकरणों का क्रय भी समय पर नहीं हो पाया।
बीच में करीब 500 करोड़ रुपये के ओवररेटेड टेंडर जारी करने का प्रयास भी किया गया था। लेकिन जब इस गड़बड़ी का भंडाफोड़ हुआ, तो आनन-फानन में उस निविदा को रद्द करके दोबारा नए सिरे से टेंडर बुलाना पड़ा। अब कॉलेजों के निरस्त होने का खामियाजा छत्तीसगढ़ के उन सैकड़ों छात्र-छात्राओं को भुगतना पड़ेगा जो इस साल डॉक्टर बनने की उम्मीद लगाए बैठे थे।
स्वास्थ्य मंत्री दें इस्तीफा
प्रदेश के मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के अपने ही निर्वाचन क्षेत्र में प्रधानमंत्री स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत मेडिकल कॉलेज न खुल पाना, यहां की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलता है। यह छत्तीसगढ़ के इतिहास में स्वास्थ्य विभाग की सबसे बड़ी नाकामी है। जनता के स्वास्थ्य के साथ हुए इस खिलवाड़ की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए स्वास्थ्य मंत्री को तत्काल प्रभाव से अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।
राकेश गुप्ता
अध्यक्ष, एएचपीआई छत्तीसगढ़ चैप्टर



