टीआरपी डेस्क। दुनिया भर के वैज्ञानिकों और खगोल विज्ञान यानी आसमान में होने वाली हलचलों में रुचि रखने वाले लोगों के लिए साल दो हजार छब्बीस का अगस्त का महीना बेहद खास होने वाला है। इस साल बारह अगस्त को प्रकृति का एक अद्भुत और अनोखा नजारा देखने को मिलने वाला है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में पूर्ण सूर्य ग्रहण (Total Solar Eclipse) कहा जाता है। आसमान में होने वाली इस अनूठी खगोलीय घटना को लेकर अभी से दुनिया भर के लोगों में काफी उत्सुकता देखी जा रही है। आइए आसान शब्दों में समझते हैं कि यह सूर्य ग्रहण क्या है और इससे जुड़ी मुख्य बातें कौन सी हैं।
क्या होता है पूर्ण सूर्य ग्रहण और आसमान में कैसे बनता है जादुई छल्ला
सूर्य ग्रहण एक स्वाभाविक प्राकृतिक घटना है। यह तब होता है जब चक्कर लगाते-लगाते चंद्रमा, सूर्य और हमारी पृथ्वी के बिल्कुल बीच में आ जाता है। इस स्थिति में चंद्रमा की वजह से सूर्य की रोशनी पृथ्वी तक नहीं पहुंच पाती है। जब चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह से अपने पीछे ढक लेता है, तो दिन के उजाले में भी कुछ समय के लिए चारों तरफ घना अंधेरा छा जाता है। इसी नजारे को पूर्ण सूर्य ग्रहण कहते हैं। इस दौरान सूर्य के चारों तरफ एक बेहद खूबसूरत और चमकती हुई रिंग यानी छल्ला दिखाई देता है। इसे विज्ञान की भाषा में कोरोना कहा जाता है, जो देखने में किसी जादुई रोशनी जैसा लगता है।
क्या भारत में दिखाई देगा यह ग्रहण
आसमान में दिलचस्पी रखने वाले भारतीय लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वे इस अद्भुत नजारे को अपनी आंखों से देख पाएंगे। तो इसका साफ जवाब है नहीं। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह पूर्ण सूर्य ग्रहण भारत के किसी भी हिस्से में दिखाई नहीं देगा। यह मुख्य रूप से यूरोप के देशों जैसे स्पेन, ग्रीनलैंड, आइसलैंड और आर्कटिक के कुछ चुनिंदा हिस्सों में ही पूरी तरह साफ नजर आएगा। चूंकि यह ग्रहण भारत के आसमान में दिखाई नहीं देगा, इसलिए देश में इसका कोई भी भौगोलिक या वैज्ञानिक असर नहीं होने वाला है।
भारत में सूतक काल के नियम होंगे या नहीं
भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं के अनुसार जो ग्रहण हमारे देश के आसमान में दिखाई नहीं देता है, उसका सूतक काल भी यहां मान्य नहीं होता है। सूतक काल का मतलब उस समय से होता है जिसे ग्रहण के दौरान शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना जाता है। चूंकि यहां यह दिखेगा ही नहीं, इसलिए भारत के लोग बिना किसी डर या चिंता के अपने रोजमर्रा के काम और पूजा-पाठ सामान्य दिनों की तरह कर सकते हैं। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि जो लोग विदेशों में इसे देख रहे हैं, वे कभी भी सीधे अपनी आंखों से सूर्य की तरफ न देखें। इसे देखने के लिए हमेशा प्रमाणित सोलर फिल्टर वाले चश्मों (Eclipse Glasses) का ही इस्तेमाल करें, वरना आंखों की रोशनी को नुकसान पहुंच सकता है।



