रायपुर। छत्तीसगढ़ में दरगाहों और उर्स के दौरान डीजे, धूमाल और नाच-गाने पर लगी पाबंदी अब हट गई है। प्रदेश के वक्फ बोर्ड ने 11 जून को जो आदेश जारी किया था, उस पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अंतरिम रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद से दरगाहों और मजहबी आयोजनों से जुड़े लोगों ने राहत की सांस ली है।

क्या था वक्फ बोर्ड का विवादित आदेश?

वक्फ बोर्ड ने 11 जून को एक फरमान जारी किया था। इसमें साफ कहा गया था कि प्रदेश की सभी दरगाहों, उर्स और अन्य धार्मिक आयोजनों में डीजे, धूमाल और नाच-गाना पूरी तरह बंद रहेगा। इतना ही नहीं, जो भी इस आदेश को नहीं मानेगा, उस पर 50 हजार रुपए तक का भारी-भरकम जुर्माना लगाने की चेतावनी भी दी गई थी। बोर्ड का तर्क था कि ये आयोजन वक्फ की संपत्तियों पर होते हैं, इसलिए वे ऐसे नियम लागू कर सकते हैं।

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वक्फ बोर्ड के इस आदेश को सुफी इस्लामिक बोर्ड के सदस्य फिरोज शाह अहमद ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। वकील देवेंद्र प्रताप सिंह ने कोर्ट के सामने तर्क रखा कि यह आदेश धार्मिक भावनाओं और आजादी के खिलाफ है। जस्टिस ए.के. प्रसाद की एकलपीठ में हुई सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के वकीलों ने अपनी बात रखी। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए वक्फ बोर्ड के उस विवादित आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है।

अब आगे क्या होगा?

कोर्ट के इस फैसले के बाद 11 जून को जारी किए गए निर्देश अब प्रभावी नहीं रह गए हैं। यानी अभी के लिए दरगाहों में होने वाले आयोजनों पर वह पाबंदी नहीं है जो बोर्ड ने लगाई थी। मामले की अगली सुनवाई में कोर्ट यह तय करेगा कि वक्फ बोर्ड के पास ऐसे प्रतिबंध लगाने का अधिकार है भी या नहीं। फिलहाल, हाईकोर्ट का स्थगन आदेश वक्फ बोर्ड के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

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