मोदी कैबिनेट से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने मंगलवार को अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार भी कर लिया है।

क्यों छोड़ना पड़ा मंत्री पद?

दरअसल, जॉर्ज कुरियन का राज्यसभा सदस्य के रूप में 6 साल का कार्यकाल पूरा हो गया है। नियम के मुताबिक, संसद सदस्य न रहने की वजह से उन्हें यह कदम उठाना पड़ा। बता दें कि कुरियन केंद्र सरकार में अल्पसंख्यक कार्य, मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय जैसे भारी-भरकम विभागों में राज्य मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इस अचानक हुए इस्तीफे के बाद रायपुर के डीकेएस भवन और कलेक्टरेट के आसपास के सियासी हलकों में भी दिल्ली की इस हलचल को लेकर काफी चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

गौरतलब है कि 65 वर्षीय जॉर्ज कुरियन मूल रूप से केरल के कोट्टायम जिले के रहने वाले हैं, लेकिन वह मध्य प्रदेश कोटे से राज्यसभा सदस्य बनकर संसद पहुंचे थे। अगस्त 2024 में उन्हें पीएम मोदी की कैबिनेट में जगह मिली थी।

See also  Share Market Today: बाजार की चमक पड़ी फीकी: शुरुआती तेजी के बाद बिकवाली का दबाव, जानें निवेश पर विदेशी निवेशकों के फैसले का असर

इस्तीफे के पीछे की इनसाइड स्टोरी:

नहीं मिला दोबारा मौका: राज्यसभा का कार्यकाल पूरा होने के बाद बीजेपी ने उन्हें दोबारा सदन भेजने के लिए उम्मीदवार नहीं बनाया।

केरल का सियासी गणित: सूत्रों का कहना है कि केरल विधानसभा चुनावों में पार्टी की उम्मीद के मुताबिक परफॉर्मेंस न होने की गाज कहीं न कहीं जॉर्ज कुरियन पर गिरी है, जिसके चलते उन्हें दोबारा मौका नहीं दिया गया।

1980 से जुड़े हैं पार्टी से: कुरियन बीजेपी के उन गिने-चुने पुराने चेहरों में से हैं, जो 1980 में पार्टी की स्थापना के समय से ही संगठन के लिए काम कर रहे हैं। राजनीति के साथ-साथ वह सुप्रीम कोर्ट में नामचीन वकील भी रहे हैं।