बिलासपुर। रायगढ़ जिले के धर्मजयगढ़ क्षेत्र में वन भूमि अतिक्रमण और पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार, केंद्र सरकार और संबंधित निजी कंपनी से जवाब तलब किया है।

11 केवी पोल पर 33 केवी लाइन बिछाने का सनसनीखेज आरोप

जनहित याचिका में आरोप है कि भालूपखना से चरखापारा तक 11 केवी विद्युत लाइन के नवीनीकरण के दौरान CSPDCL के नए पोल लगाए गए। इन्हीं पोलों का उपयोग कर निजी जल विद्युत परियोजना की 33 केवी ट्रांसमिशन लाइन भी बिछा दी गई। इससे अलग से वन भूमि डायवर्सन और वैधानिक अनुमतियों की जरूरत से बचा गया। याचिका में इसे ‘फर्जी नवीनीकरण’ और मिलीभगत बताया गया है।

धनबादा पावर परियोजना पर बिना अनुमति काम का आरोप

याचिकाकर्ता विवेक कुमार पांडेय ने आरोप लगाया कि धरमजयगढ़ के ग्राम भालूपखना स्थित धनबादा पावर की 7.50 मेगावाट लघु जल विद्युत परियोजना के लिए वन स्वीकृतियां लिए बिना ही वन एवं राजस्व भूमि में गैर-वानिकी गतिविधियां की गईं। आरोप है कि अनुमति मिलने से पहले ही निर्माण कार्य कर लिया गया।

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एक ही ठेकेदार को दोनों काम, पारदर्शिता पर सवाल

याचिका में दावा है कि 11 केवी लाइन नवीनीकरण और निजी परियोजना की 33 केवी ट्रांसमिशन लाइन, दोनों का ठेका एक ही ठेकेदार कुलदीप सिंह के पास था। अलग-अलग संरचना बनाने के बजाय एक ही ढांचे का उपयोग किया गया, जिससे शासकीय और निजी कार्यों की सीमाएं धुंधली हो गईं।

हाथी प्रभावित क्षेत्र में लाइन विस्तार से बढ़ी चिंता

धरमजयगढ़ वनमंडल प्रदेश के प्रमुख हाथी प्रभावित क्षेत्रों में है, जहां सैकड़ों हाथियों का आवागमन रहता है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत हाथी अनुसूची-1 के संरक्षित वन्यजीव हैं। याचिका में 33 केवी लाइन विस्तार से वन्यजीवों को खतरे की आशंका जताई गई है।

पहली PIL सुरक्षा राशि के कारण हुई थी खारिज

याचिकाकर्ता ने पहले WP(PIL) 24/2026 दायर की थी। सुरक्षा राशि जमा करने से छूट नहीं मिलने पर हाईकोर्ट ने 7 मई 2026 को याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने नई याचिका की छूट दी थी, जिसके बाद वर्तमान PIL दाखिल हुई।

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अगली सुनवाई 13 जुलाई को, निजी कंपनी ने दिया जवाब

19 मई 2026 को प्रारंभिक सुनवाई में कोर्ट ने नोटिस जारी किए। 18 जून को राज्य सरकार ने जवाब के लिए समय मांगा, जिसे एक सप्ताह की मोहलत मिली। निजी कंपनी की ओर से जवाब पहले ही दाखिल किया जा चुका है। याचिकाकर्ता को रिजॉइंडर दाखिल करने की अनुमति है। अगली सुनवाई 13 जुलाई 2026 को होगी।