रायपुर। राजधानी रायपुर के माना इलाके में स्थित नकटी गांव में प्रस्तावित ‘विधायक कॉलोनी’ के लिए प्रशासन द्वारा लगभग 80 मकानों पर बुलडोजर चलाए जाने से नाराज ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर भारी विरोध प्रदर्शन किया है। इस बेदखली से गुस्साए प्रभावित परिवारों ने कलेक्ट्रेट का घेराव कर प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपने लिए न्याय की गुहार लगाई।

विस्थापन के नाम पर ठगी का आरोप, रो पड़ीं महिलाएं

कलेक्ट्रेट घेराव के दौरान प्रदर्शन कर रही महिलाओं के आंसू छलक पड़े। ग्रामीणों ने रोष जताते हुए कलेक्टर, सांसद बृजमोहन अग्रवाल और विधायक अनुज शर्मा के खिलाफ नारे लगाए। प्रभावित परिवारों का आरोप है कि उन्हें विस्थापन के नाम पर बुरी तरह ठगा गया है। 15 से 20 सदस्यों वाले बड़े परिवारों को रहने के लिए महज 1 कमरे का फ्लैट आवंटित किया गया है, जिसमें इतने बड़े परिवार का गुजारा होना नामुमकिन है।

प्रदर्शनकारियों ने भावुक होकर पूछा कि हर बार केवल गरीबों पर ही अत्याचार क्यों होता है? उन्होंने अपने खेत और जमीनें बेचकर जीवनभर की कमाई से ये घर बनाए थे, जिन्हें प्रशासन ने पल भर में जमींदोज कर दिया। ग्रामीणों ने तीखा सवाल दागते हुए कहा, चुनाव के समय वोट मांगते वक्त नेताओं को यह याद क्यों नहीं आया कि हम अवैध कब्जाधारी हैं? हमारी साफ मांग है कि हमें हमारे अपने ही गांव में दोबारा मकान बनाकर दिया जाए।

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आगे क्या होगा?

ग्रामीणों के इस उग्र प्रदर्शन और कलेक्ट्रेट के सामने प्रशासन पर पुनर्वास नीति की समीक्षा करने का भारी दबाव बन गया है। यदि प्रभावित परिवारों को जल्द ही सम्मानजनक विस्थापन और पर्याप्त आवासीय जमीन नहीं दी गई, तो यह आंदोलन आने वाले दिनों में और अधिक उग्र रूप ले सकता है।