सरगुजा। मैनपाट क्षेत्र में प्रस्तावित बॉक्साइट खदान परियोजना की जनसुनवाई बुधवार को कमलेश्वरपुर-केसरा में भारी विरोध के बीच संपन्न हुई। बड़ी संख्या में पहुंचे ग्रामीणों, तिब्बती समाज और जनप्रतिनिधियों ने परियोजना को पर्यावरण, जल स्रोतों और आजीविका के लिए गंभीर खतरा बताते हुए तत्काल निरस्त करने की मांग की।

खनन से बिगड़ेगा पर्यावरण संतुलन

जनसुनवाई शुरू होते ही ग्रामीणों ने नारेबाजी कर विरोध जताया। उनका कहना था कि मैनपाट घने जंगलों और प्राकृतिक जल स्रोतों से समृद्ध है। बड़े पैमाने पर खनन से पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ेगा, जल स्रोत सूखेंगे और खेती-पशुपालन प्रभावित होगा। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर पर्यावरण संरक्षण की मांग उठाई।

तिब्बती समाज का धार्मिक स्थल भी खतरे में

तिब्बती समाज के प्रतिनिधियों ने आपत्ति जताई कि प्रस्तावित 145.8 हेक्टेयर खदान क्षेत्र में करीब 50.3 हेक्टेयर भूमि उनके कब्जे में है। इसी जमीन पर उनका धार्मिक स्थल और मंदिर भी स्थित है। खनन शुरू होने पर समुदाय के सामने विस्थापन का संकट खड़ा हो जाएगा और उनकी सांस्कृतिक-धार्मिक पहचान प्रभावित होगी।

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EIA रिपोर्ट पर भी उठे सवाल

जनसुनवाई में पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) रिपोर्ट को लेकर भी हंगामा हुआ। केसरा के सरपंच ने आरोप लगाया कि रिपोर्ट की पावती पर उनके फर्जी हस्ताक्षर किए गए। रोपाखार और कमलेश्वरपुर के सरपंचों ने कहा कि रिपोर्ट समय पर नहीं मिली, जिससे आपत्तियां तैयार करने का मौका नहीं मिला। अधिवक्ता राजेश गुप्ता ने आरोप लगाया कि जनसुनवाई में पर्यावरण नियमों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया।

भाजपा विधायक का भी ग्रामीणों को समर्थन

सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो भी जनसुनवाई में पहुंचे और ग्रामीणों के आंदोलन का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि विकास परियोजना में स्थानीय लोगों की सहमति सर्वोपरि है। ग्रामीणों के विरोध के बीच बॉक्साइट खदान परियोजना को आगे नहीं बढ़ने दिया जाएगा।

प्रशासन ने लोगों की आपत्तियां दर्ज कर नियमानुसार आगे भेजने का भरोसा दिलाया। मैनपाट में प्रस्तावित खदान को लेकर लंबे समय से विरोध जारी है