चरण पादुका टेंडर रद्द, कांग्रेस का हमला

टीआरपी। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए 50 करोड़ रुपये की लागत से 12 लाख 40 हजार जोड़ी कैनवास जूतों की खरीद के लिए जारी टेंडर को पूरी तरह से निरस्त कर दिया है। इस फैसले के बाद प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता नितिन भंसाली ने इसे भ्रष्टाचारी भाजपा सरकार के मुंह पर करारा तमाचा बताते हुए सरकार पर आदिवासियों के हक पर डकैती डालने का आरोप लगाया है।

यह मामला सीधे तौर पर छत्तीसगढ़ के लाखों गरीब तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों और आदिवासियों के अधिकारों से जुड़ा है। हाईकोर्ट द्वारा नियमों में हेरफेर के कारण टेंडर रद्द किए जाने से सरकारी खरीद प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जिससे वनांचल क्षेत्रों में साय सरकार के खिलाफ असंतोष बढ़ सकता है।

नियमों में हेरफेर कर पसंदीदा कंपनी को फायदा पहुंचाने का आरोप

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता नितिन भंसाली ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि उच्च न्यायालय बिलासपुर के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने इस टेंडर को निरस्त किया है। अदालत ने पाया कि वन विभाग ने खरीद प्रक्रिया में जानबूझकर और षडयंत्र पूर्वक कुछ ऐसी शर्तें जोड़ी थीं, जो पारदर्शी नहीं थीं और प्रतिस्पर्धा को सीमित करती थीं। भंसाली का आरोप है कि नियमों में यह हेरफेर मध्य प्रदेश के एक वरिष्ठ भाजपा नेता की कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए किया गया था।

See also  शेयर बाजार की चाल पर दिखेगा अमेरिका-ईरान तनाव का असर

कांग्रेस प्रवक्ता ने मांग की है कि केवल टेंडर रद्द करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इस पूरे मामले में कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार में संलिप्त भाजपा नेताओं, मंत्रियों और अधिकारियों की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस भारी भ्रष्टाचार का शुरुआत से ही विरोध कर रही थी, लेकिन अधिनायकवादी साय सरकार ने इसे अनसुना कर दिया। इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले साल भी संग्राहकों को एक पैर में 5 नंबर तो दूसरे पैर में 7 नंबर की अनुपयोगी चप्पलें बांटी गई थीं।

हाईकोर्ट बिलासपुर की खंडपीठ ने तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए 50 करोड़ रुपये की लागत वाले कुल 12 लाख 40 हजार जोड़ी कैनवास जूतों के टेंडर को निरस्त किया है।

कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार आदिवासियों से जुड़ी शहीद महेंद्र कर्मा तेंदूपत्ता संग्राहक बीमा योजना और बच्चों की छात्रवृत्ति योजना को पहले ही बंद कर चुकी है।

हाईकोर्ट के इस बड़े फैसले और कांग्रेस के आक्रामक रुख के बाद वन विभाग को अब नए सिरे से पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया शुरू करनी होगी, जिससे आगामी दिनों में चरण पादुका वितरण योजना में देरी होने की संभावना है।

See also  VIDEO : प्रदेश के इस धान खरीदी केंद्र में लगा दी गई है धान की फसल, तस्वीरें तो यही बता रही हैं..!