टीआरपी। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट (आईआईआईडीईएम) में मीडिया एवं संचार अधिकारियों के लिए दूसरे एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। 3 जुलाई 2026 को आयोजित इस महामंथन में सोशल मीडिया पर फैलने वाली भ्रामक सूचनाओं और डीपफेक जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए नई रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा हुई।
इस राष्ट्रीय सम्मेलन में छत्तीसगढ़ के सभी 33 जिलों के जिला जनसंपर्क अधिकारी (PRO), सहायक मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी और जनसंपर्क विभाग के अपर संचालक शामिल हुए। डिजिटल युग में फेक न्यूज और भ्रामक डिजिटल सामग्री जमीनी स्तर पर चुनावी निष्पक्षता को प्रभावित करती है, जिससे निपटने के लिए अब प्रदेश के स्थानीय अधिकारी हाईटेक ट्रेनिंग से लैस हो चुके हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त ने दिए कड़े निर्देश
सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली भ्रामक एवं फर्जी सूचनाओं के प्रति अधिकारियों को हर वक्त सतर्क रहने के निर्देश दिए। उन्होंने साफ किया कि तथ्यात्मक जानकारी का तेजी से प्रसार करके ही गलत सूचनाओं पर अंकुश लगाया जा सकता है। उन्होंने हाल के विधानसभा चुनावों में हुए रिकॉर्ड मतदान को निर्वाचन प्रणाली पर जनता के गहरे विश्वास का प्रतीक बताया।
वहीं, चुनाव आयुक्त डॉ. विवेक जोशी ने डिजिटल युग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डीपफेक से उत्पन्न होने वाले खतरों को रेखांकित किया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप इसका प्रभावी ढंग से मुकाबला करें और चुनावी साक्षरता क्लबों के माध्यम से युवा मतदाताओं को निर्वाचन प्रक्रिया से जोड़ें।
तकनीकी सत्रों में दी गई व्यावहारिक ट्रेनिंग
दिनभर चले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में देश के 16 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के 260 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन के दौरान मतदाता सूची प्रबंधन, मतदान एवं मतगणना प्रक्रिया, ईसीआईनेट (ECINET), विधिक प्रावधानों, प्रेस विज्ञप्ति लेखन और सोशल मीडिया प्रबंधन पर तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इसके साथ ही, हाल ही में चुनाव संपन्न कराने वाले राज्यों के अधिकारियों ने निर्वाचन प्रबंधन से जुड़े अपने व्यावहारिक अनुभव भी साझा किए।

आयोजन तिथि: 3 जुलाई 2026 (शुक्रवार)
कुल प्रतिभागी: 16 राज्यों व यूटी से 260 से अधिक मीडिया व संचार अधिकारी।
छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व: प्रदेश के सभी 33 जिलों के जनसंपर्क अधिकारी (PRO) शामिल।
प्रमुख फोकस: सोशल मीडिया मॉनिटरिंग, एआई (AI), डीपफेक नियंत्रण और चुनावी साक्षरता।
इस राष्ट्रीय प्रशिक्षण के बाद छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में सोशल मीडिया और डिजिटल कंटेंट की निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। जिला स्तर पर जनसंपर्क अधिकारी भ्रामक खबरों का तुरंत खंडन करने और मतदाताओं तक सही व सटीक जानकारी पहुंचाने के लिए नए टूल और तकनीकों का इस्तेमाल शुरू करेंगे।


