Gujarat bans Conocarpus plants

रायपुर। पर्यावरण संरक्षण के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। पूरे राज्य में विदेशी और आक्रामक प्रजाति कोनोकार्पस के नए पौधे लगाने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। आवास एवं पर्यावरण विभाग ने 6 जुलाई को पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 की धारा-5 के तहत आदेश जारी किया है।

अब कोई भी नया कोनोकार्पस नहीं

सरकार के आदेश के अनुसार अब राज्य की सीमा में कोई भी व्यक्ति, सरकारी विभाग, नगर निगम, पंचायत, सार्वजनिक उपक्रम, स्वायत्त संस्था या निजी एजेंसी कोनोकार्पस का नया वृक्षारोपण नहीं कर सकेगी। यह प्रतिबंध तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।

जानें, क्यों लगाया गया प्रतिबंध

कोनोकार्पस मूल रूप से विदेशी तटीय प्रजाति है, जो तेजी से बढ़ती है। इसे कई राज्यों में सड़क किनारे सजावटी पेड़ के रूप में लगाया गया।

सुप्रीम कोर्ट की केंद्रीय सशक्त समिति की 21 अगस्त 2025 की रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने यह कदम उठाया। रिपोर्ट में कहा गया कि यह प्रजाति:

  • स्थानीय वनस्पतियों और जैव विविधता को नुकसान पहुंचा सकती है
  • प्राकृतिक पारिस्थितिकी को असंतुलित कर सकती है
  • भूजल संसाधनों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है
  • जनस्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकती है
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देशी प्रजातियों का होगा रोपण

समिति ने नए रोपण पर रोक के साथ-साथ पहले से लगे पौधों को चरणबद्ध तरीके से देशी प्रजातियों से बदलने की भी सिफारिश की थी। सरकार इसी दिशा में आगे काम करेगी।

पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए सरकार ने आपत्ति-सुझाव की सामान्य प्रक्रिया को भी इस बार नहीं अपनाया। आदेश में कहा गया है कि लोकहित में तत्काल निर्णय जरूरी था।

0 सप्तपर्णी का पेड़

विधानसभा में उठा था मामला

गौरतलब है कि पिछले वर्षों में रायपुर सहित कई शहरों में सड़क डिवाइडर, पार्क और सरकारी परिसरों में कोनोकार्पस का उपयोग तेजी से बढ़ा है। पिछले विधानसभा सत्र में कोनोकार्पस और छातिम (सप्तपर्णी) के पौधों को लेकर चर्चा हुई थी और सरकार ने कहा था कि खतरनाक प्रकृति के इन पेड़ों को जल्द ही प्रतिबंधित किया जाएगा। फिलहाल सरकार ने कोनोकार्पस के रोपण पर रोक लगाई है, मगर छातिम (सप्तपर्णी) को लेकर कोई भी फैसला नहीं किया गया है। अध्ययन से पता चला है कि छातिम के पेड़ों से लोगों को सांस की बीमारियों का संक्रमण होता है।

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