cg news: छत्तीसगढ़ में गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर से बचाव के लिए 13 जुलाई से 18 जुलाई 2026 तक विशेष HPV टीकाकरण सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के सभी सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर इस अभियान के तहत पात्र बालिकाओं के लिए व्यापक टीकाकरण व्यवस्था सुनिश्चित की है।
यह अभियान छत्तीसगढ़ की बेटियों को भविष्य में होने वाले जानलेवा सर्वाइकल कैंसर से सुरक्षित रखने का एक बड़ा कदम है। शत-प्रतिशत टीकाकरण से न केवल प्रदेश की किशोरियों का स्वास्थ्य सुरक्षित होगा, बल्कि यह आने वाली पीढ़ी में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के बोझ को कम करने में भी निर्णायक साबित होगा।
गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की रोकथाम का सुरक्षित उपाय
राज्य टीकाकरण अधिकारी, डॉ. वी. आर. भगत के अनुसार, HPV टीका गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की रोकथाम का सबसे प्रभावी और सुरक्षित उपाय है। उन्होंने इस टीकाकरण को बेटियों के उज्ज्वल और स्वस्थ भविष्य में किया गया एक निवेश बताया है।
अभियान के सफल क्रियान्वयन के लिए स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और स्वास्थ्य संस्थानों के माध्यम से जन-जागरूकता फैलाई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें पूरे प्रदेश में सक्रिय हैं और स्थानीय जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों तथा अभिभावकों से इस मुहिम को सफल बनाने में सहयोग की अपील की गई है। विभाग ने सभी जिलों को अभियान की सतत निगरानी करने और शत-प्रतिशत कवरेज का लक्ष्य पूरा करने के कड़े निर्देश दिए हैं।
अभियान की अवधि समाप्त होने के बाद, स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्राप्त आंकड़ों की समीक्षा की जाएगी। विभाग का लक्ष्य राज्य के हर पात्र बालिका तक पहुंच सुनिश्चित करना है, ताकि भविष्य में होने वाली गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को समय रहते रोका जा सके।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सवाल – एचपीवी टीकाकरण क्यों जरूरी है
जवाब – महिलाओं में भविष्य में होने वाली जानलेवा सर्वाइकल कैंसर से सुरक्षित रखने के लिए टीकाकरण आवश्यक है।
सवाल – टीकाकरण अभियान कब से कब तक चलेगा
जवाब – कैसर से बचाव के लिए टीकाकरण अभियान 13 जुलाई से शुरू हो चुका है, यह अभियान 18 जुलाई तक चलेगा।
सवाल – एचपीवी टीका किन किन जगहों पर लगाया जाएगा।
जवाब -प्रदेशभर के सभी सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर टीकाकरण की व्यवस्था की गई है।
सवाल – स्वास्थ्य विभाग द्वारा टीकाकरण के लिए क्या किया जा रहा है।
जवाब – स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और स्वास्थ्य संस्थानों के माध्यम से जनजागरूकता फैलाई जा रही है।


