Juvenile offender absconds। छत्तीसगढ़ में बाल संप्रेक्षण गृहों की सुरक्षा व्यवस्था पर फिर सवाल उठ गए हैं। अंबिकापुर के गांधीनगर थाना स्थित बाल संप्रेक्षण गृह से मंगलवार देर शाम 13 अपचारी बालक दीवार फांदकर फरार हो गए। चौंकाने वाली बात ये है कि एक महीने के भीतर इसी केंद्र से यह दूसरी बार भागने की घटना है। मजे की बात यह है कि पिछली बार भी 13 नाबालिग फरार हुए थे।

कैसे भागे सभी अपचारी बालक

Juvenile offender absconds : बाल संप्रेक्षण गृह के स्टाफ के मुताबिक फरार हुए सभी 13 बालक अलग-अलग आपराधिक मामलों में संप्रेक्षण गृह में बंद थे। इन सभी ने मिलकर पहले से प्लान बनाया। प्लान के तहत सभी ने बाल संप्रेक्षण गृह के पिछले पुराने दरवाजे में लगे लोहे के रॉड को तोड़ दिया। इसके बाद संप्रेक्षण गृह के पीछे की ऊंची दीवार को फांदकर सभी एक साथ फरार हो गए। 

भागने के बाद काफी देर तक किसी को भनक तक नहीं लगी। बाद में गिनती के दौरान मामला सामने आने पर हड़कंप मच गया।

पुलिस ने शुरू की तलाश

Juvenile offender absconds : घटना की सूचना मिलते ही गांधीनगर थाना पुलिस और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। फरार बाल अपचारियों को पकड़ने के लिए कई टीमें बनाकर अलग-अलग इलाकों में दबिश दी जा रही है।

पुलिस आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और तकनीकी सहायता से भी उनकी लोकेशन ट्रेस करने की कोशिश हो रही है। अभी तक किसी की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है।

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एक महीने में दूसरी घटना, सुरक्षा पर सवाल

Juvenile offender absconds : अंबिकापुर के बाल संप्रेक्षण गृह में ये पहली बार नहीं है। बीते 23 जून को भी यहीं से 13 अपचारी बालक फरार हुए थे। उनमें से अब तक 2 बालक पकड़े नहीं जा सके हैं। एक हफ्ते में एक ही जगह से दो बार 13-13 बालकों का फरार होना सिस्टम की बड़ी लापरवाही को दिखाता है।

संप्रेक्षण गृह की पर्यवेक्षक ने क्या बताया ?

Juvenile offender absconds : बाल संप्रेक्षण गृह की पर्यवेक्षक शमा नूरी ने मीडिया को बताया कि पिछली बार भागे 13 बच्चों में से जिन 10 बच्चों को पकड़ा गया था, उन्हीं में से एक बाल अपचारी मास्टर माइंड है। उसी ने भागने की योजना बनाई और फिर पीछली बार के 3 और 10 नए बच्चे फरार हुए हैं।

गृह की सुरक्षा व्यवस्था बेहद कमजोर 

शमा नूरी ने स्वीकार किया कि इस बाल संप्रेक्षण गृह की सुरक्षा व्यवस्था कमजोर है। उसके मुताबिक जिले के पुलिस अधीक्षक से यहां के लिए गार्ड बढ़ाने की मांग की गई है, वहीं भवन में लगे खिड़की दरवाजों में लोहे के ग्रिल लगाने का काम चल ही रहा है। पिछली बार बच्चों के भागने की घटना के बाद संप्रेक्षण गृह को सुरक्षित बनाने का प्रयास चल रहा है। नूरी के मुताबिक भागे बच्चे अलग अलग अपराधों में शामिल रहे हैं।

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बिलासपुर में चौकीदार की हत्या कर भागे थे अपचारी 

छत्तीसगढ़ में बाल संप्रेक्षण गृहों की स्थिति सिर्फ अंबिकापुर तक सीमित नहीं है। बिलासपुर जिले में बीते रविवार की रात करीब 11 बजे बाल संप्रेक्षण गृह के अंदर चौकीदार नरेंद्र कुमार खांडे की हत्या कर दी गई थी। आरोप है कि 4 बाल अपचारियों ने पहले उसके साथ मारपीट की, फिर हाथ-पैर बांधकर गला दबा कर उसकी हत्या कर दी। सभी सजायाफ्ता बल अपचारी हैं और उनकी उम्र 20–21 साल की बताई जा रही है।

लगातार हो रही इन घटनाओं से साफ है कि प्रदेश के बाल संप्रेक्षण गृहों में सुरक्षा, निगरानी और स्टाफ की कमी बड़ी समस्या बन गई है। प्रशासन अब फरार बालकों की तलाश के साथ-साथ पूरे सिस्टम की समीक्षा में जुटा है।

FAQ:

बाल संप्रेक्षण गृह क्या होता है ? 

बाल संप्रेक्षण गृह (Observation Home) किशोर न्याय अधिनियम के तहत विधि विरुद्ध (अपराध) कार्य करने वाले 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को अस्थायी रूप से सुधार और संरक्षण के लिए रखने का स्थान है

बाल अपराधियों को सजा कैसे मिलती है?

किशोरों (नाबालिगों) को वयस्क अपराधियों की तरह जेल या सामान्य अदालत का सामना नहीं करना पड़ता।

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किशोर न्याय बोर्ड (Juvenile Justice Board): नाबालिगों के मामलों की सुनवाई विशेष बोर्ड द्वारा की जाती है।

सजा का स्वरूप: सजा के बजाय मुख्य उद्देश्य उनका सुधार होता है। उन्हें अधिकतम 3 साल तक बाल सुधार गृह (Special Home) में भेजा जा सकता है, जहाँ शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण और काउंसलिंग की सुविधा दी जाती है। 

गंभीर अपराध: 16 से 18 वर्ष के किशोर यदि जघन्य अपराध करते हैं, तो बोर्ड द्वारा वयस्क की तरह मुकदमा चलाकर उन्हें सुरक्षित स्थान (Place of Safety) में रखने का प्रावधान है।

छत्तीसगढ़ में बाल अपचारी बालकों के गृहों से भागने की मूल वजह क्या है? 

छत्तीसगढ़ (जैसे अंबिकापुर या दुर्ग) के बाल संप्रेक्षण गृहों से बच्चों के भागने की घटनाओं के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

सुरक्षा में कमी: सीसीटीवी कैमरों का खराब होना और सुरक्षा गार्डों की कमी के कारण निगरानी का कमजोर होना।

बुनियादी सुविधाओं का अभाव: मनोरंजक गतिविधियों, उचित काउंसलिंग और कुशल स्टाफ की कमी से किशोरों का दम घुटना।

गैंग और अपराधी प्रवृति: कई बाल अपराधियों का आपराधिक पृष्ठभूमि से होना और सुधार गृह के सख्त नियमों को न मानकर बाहर भागने की कोशिश करना।

संरक्षित बच्चों के साथ रखा जाना: सुप्रीम कोर्ट के नियमों के विपरीत बाल अपराधियों और अनाथ या बेसहारा बच्चों को एक ही परिसर में रखने से तनाव का माहौल बनना।