Fraud in PM Awas : केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण में कोरबा जिले के करतला विकासखंड से लगातार फर्जीवाड़ा सामने आ रहा है। यहां के ग्राम पंचायत कराईनारा के आश्रित ग्राम भेलवागुड़ी में हितग्राही के नाम स्वीकृत आवास अधूरा होने के बावजूद दूसरे घर की फोटो जियो टैग कर पूरी राशि निकाल ली गई।
अधूरा मकान, पूरा भुगतान
Fraud in PM Awas : ग्राम पंचायत कराईनारा के आश्रित ग्राम भेलवागुड़ी में हितग्राही गंगा राम पिता विशाल दास के नाम स्वीकृत आवास का निर्माण अधूरा होने के बावजूद किसी दूसरे आवास की तस्वीरें जियो टैग कर पूरी राशि का भुगतान करा लिया गया है। दरअसल सत्र 2024-25 में स्वीकृत इस आवास के लिए सरकारी रिकॉर्ड में मकान पूर्ण दिखाया गया है, लेकिन मौके पर निर्माण अब भी अधूरा है।
कितना पैसा निकला ?
Fraud in PM Awas : मिली जानकारी के मुताबिक, सत्र 2024-25 में स्वीकृत इस आवास के लिए हितग्राही के खाते में प्रथम किश्त 40 हजार रुपये, द्वितीय किश्त 55 हजार रुपये तथा तृतीय किश्त 25 हजार रुपये जमा किए गए। इसके अलावा मनरेगा के तहत मजदूरी मद में भी भुगतान दर्ज है। सरकारी रिकॉर्ड में आवास पूर्ण दर्शाया गया है, जबकि मौके पर मकान अब भी अधूरा है और जियो टैग किसी अन्य हितग्राही के आवास का किया गया।
इस मामले ने योजना की निगरानी व्यवस्था और जनपद स्तर के निरीक्षण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पहले उजागर कई मामले दबा दिए गए, जिम्मेदारों पर कार्रवाई न होने से मनोबल बढ़ा है।
मिलीभगत के आरोप
Fraud in PM Awas : इस मामले को लेकर आरोप लगाया जा रहा है कि आवास मित्र, रोजगार सहायक, पंचायत सचिव और जनपद स्तर पर निगरानी से जुड़े अधिकारियों की मिलीभगत से ही फर्जी जियो टैगिंग कर भुगतान कराया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो ऐसे कई मामले सामने आ सकते हैं। लोगों का कहना है कि पहले भी ऐसे कई मामले उजागर हुए, लेकिन जिम्मेदारों पर कार्रवाई न होने से मनोबल बढ़ गया है।
जनपद सदस्यों की निगरानी पर सवाल
Fraud in PM Awas : इस मामले में करतला के जनपद सदस्यों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। सदस्य लगातार PM आवास के निरीक्षण का दावा करते रहे हैं, लेकिन उनके क्षेत्र में अधूरे आवास को पूर्ण दिखाकर भुगतान हो गया और उन्हें भनक तक नहीं लगी।
ग्रामीणों की मांग
Fraud in PM Awas : ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने, राशि की वसूली करने और योजना में हुई कथित अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
बहरहाल गरीबों के पक्के घर के सपने पर पानी फेरने वाले इस फर्जीवाड़े ने PM आवास योजना की निगरानी और जियो टैगिंग व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब प्रशासन से कार्रवाई का इंतजार है।
FAQ :
क्या है प्रधानमंत्री आवास योजना ?
प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) भारत सरकार की एक प्रमुख पहल है, जिसका लक्ष्य है ‘Housing for All’। यह योजना ग्रामीण (PMAY-G) और शहरी (PMAY-U) दोनों क्षेत्रों में गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को पक्का घर उपलब्ध कराती है। योजना के तहत घरों में शौचालय, पानी, बिजली और रसोईघर जैसी बुनियादी सुविधाएँ सुनिश्चित की जाती हैं और महिला सदस्य को घर का मालिकाना हक दिया जाता है, जिससे महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलता है।
पीएम आवास योजना के तहत भुगतान का क्या प्रावधान है ?
पीएम आवास योजना के तहत पक्का घर बनाने के लिए सरकार आर्थिक मदद देती है। सामान्य ग्रामीण इलाकों में यह राशि 1.20 लाख रुपये है, जबकि पर्वतीय और कठिन क्षेत्रों में यह 1.30 लाख रुपये है। पात्र परिवार सर्वे में अपना नाम दर्ज करके इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। यह पहल ग्रामीण भारत में स्थायी आवास सुविधा उपलब्ध कराने और जीवन स्तर सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
पीएम आवास योजना के लिए पात्रता का मापदंड क्या है ?
- PMAY समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS), LIG (निम्न आय समूह), MIG-I (मध्य आय समूह I), और MIG-II (मध्य आय समूह- II) वर्गों के लिए उपलब्ध है।
- प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) का लाभार्थी:
पति, पत्नी और अविवाहित बेटियां/बेटे हो सकते हैं
उनके पास कोई पक्का घर नहीं होना चाहिए, जिसका अर्थ है कि घर उनके नाम पर या पूरे भारत में परिवार के किसी अन्य सदस्य के नाम पर नहीं होना चाहिए।


