PMKKKY CAG Report Chhattisgarh: खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए शुरू की गई प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना के क्रियान्वयन को लेकर भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ में योजना के तहत 4,536.58 करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन खनन प्रभावित बड़ी आबादी तक इसका अपेक्षित लाभ नहीं पहुंच सका।

सीएजी की ऑडिट रिपोर्ट बताती है कि जिन 11 जिलों की जांच की गई, वहां प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित 1,734 गांवों में से 754 गांव करीब 44% विकास कार्यों से पूरी तरह वंचित रहे। रिपोर्ट में बिना समग्र योजना के धन खर्च करने, निगरानी की कमी और नियमों के उल्लंघन जैसी कई गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है।

PMKKKY के उद्देश्य से भटका खर्च

रिपोर्ट के अनुसार कई जिलों में बिना वार्षिक कार्ययोजना और स्वीकृत बजट के ही जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) की राशि खर्च की गई। इसके अलावा केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के विपरीत ₹1.68 करोड़ राज्य स्तरीय डीएमएफ प्रकोष्ठ को हस्तांतरित किए गए। मार्च 2024 तक वहां ₹10.82 करोड़ की राशि उपयोग के बिना पड़ी रही। सीएजी ने यह भी पाया कि प्रभावित लोगों के कल्याण के लिए निर्धारित ₹30.73 करोड़ का उपयोग सरकारी कार्यालयों के निर्माण और सौंदर्यीकरण जैसे कार्यों में किया गया।

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अधूरे प्रोजेक्ट बने चिंता का कारण

रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रभावी निगरानी के अभाव में कई परियोजनाएं अधूरी रह गईं। कला एवं संस्कृति केंद्र, बायोगैस संयंत्र और मुर्गी पालन जैसी परियोजनाएं पूरी नहीं हो सकीं। कई स्थानों पर ये परियोजनाएं उपयोग से पहले ही बेकार होने लगीं। इसके अलावा गैर-योजनाबद्ध गतिविधियों पर ₹41.80 करोड़ का निष्फल व्यय दर्ज किया गया। सीएजी ने खरीद प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ भंडार क्रय नियम, 2002 का पालन किए बिना खरीद की गई। इससे ₹56 करोड़ से अधिक की वित्तीय अनियमितताएं सामने आईं।

वेबसाइटों पर नहीं मिली जरूरी जानकारी

पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई डीएमएफ वेबसाइटों पर भी आवश्यक जानकारी उपलब्ध नहीं मिली। 12 जिलों की वेबसाइटों की समीक्षा में कार्यों की प्रगति, स्वीकृत परियोजनाओं और बैठकों का पूरा विवरण उपलब्ध नहीं था। इससे आम लोगों के लिए योजनाओं की निगरानी करना मुश्किल हो गया। रिपोर्ट के अनुसार योजना की निगरानी के लिए पर्याप्त कर्मचारी भी उपलब्ध नहीं हैं। इसके अलावा बेमेतरा और महासमुंद में स्वीकृत पद 100 प्रतिशत खाली पाए गए। वहीं बलोद, बिलासपुर, रायगढ़ और राजनांदगांव में 50 प्रतिशत से अधिक महत्वपूर्ण पद रिक्त हैं। सीएजी का मानना है कि कर्मचारियों की कमी के कारण परियोजनाओं की निगरानी और मूल्यांकन काम प्रभावित हुआ है।

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