Municipal Corporation: राजधानी रायपुर के नगर निगम प्रशासन पर सवाल उठाते हुए नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि रायपुर नगर निगम में इन दिनों केवल बंद कमरों में बैठकों का दौर चल रहा है। कभी विधायक, कभी महापौर तो कभी आयुक्त द्वारा बैठकें ली जा रही हैं, लेकिन आम जनता की मूलभूत समस्याओं और बुनियादी सुविधाओं के समाधान के लिए कोई कठोर कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
टैक्स वसूली पर सख्ती बनाम मूलभूत सुविधाओं की अनदेखी
नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने कड़ा सवाल उठाते हुए कहा कि जिस प्रकार नगर निगम संपत्ति कर और टैक्स वसूली के लिए अधिकारियों की जवाबदेही और जिम्मेदारी तय कर रहा है, वैसी ही सख्ती आम जनता की मूलभूत सुविधाओं के लिए क्यों नहीं दिखाई जा रही? यदि बुनियादी जरूरतों और साफ-सफाई के प्रति वैसी ही जिम्मेदारी तय होती, तो आज राजधानी रायपुर की तस्वीर कुछ और होती। उन्होंने आरोप लगाया कि शहर की सफाई व्यवस्था इतनी लचर हो चुकी है कि इसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ा है, जिसके परिणामस्वरूप रायपुर शहर के सभी 70 वार्ड पहली बार जलभराव की चपेट में आ गए थे और लोगों के घरों में पानी घुसने से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा था।
अधिकारियों की कार्यप्रणाली और बैठकों पर तंज
आकाश तिवारी ने अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब भी अधिकारियों से संपर्क किया जाता है, उनका एक ही जवाब होता है कि वे “बैठक में व्यस्त हैं”। नगर निगम का गठन जनता के कार्यों को सुचारू रूप से चलाने के लिए हुआ है, न कि केवल कागजी बैठकें करने के लिए। अधिकारी बैठकों में इतने व्यस्त हैं कि वे अपनी कुर्सियों पर समय ही नहीं दे पा रहे हैं। जनता ने महापौर को अपनी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए चुना है, न कि केवल अनगिनत बैठकें आयोजित करने के लिए।

नेता प्रतिपक्ष द्वारा उठाए गए प्रमुख बिंदु और आरोप
नेता प्रतिपक्ष ने निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तीन प्रमुख विसंगतियों को रेखांकित किया है:
सिटी डेवलपमेंट प्लान: महापौर द्वारा वर्ष 2025 में पूरे 70 वार्डों के लिए ‘सिटी डेवलप प्लान’ बनाया गया था, लेकिन एक साल से ज्यादा का समय बीत जाने के बाद भी वह धरातल पर लागू नहीं हो पाया है।
जल बोर्ड के कार्य: जनवरी 2026 में गठित जलबोर्ड के कार्य अभी भी नगर निगम मुख्यालय की ऑफिस टेबल तक ही सीमित हैं, जमीनी स्तर पर कोई असर नहीं दिख रहा है।
वूमेन गारमेंट फैक्ट्री: मोवा में हजारों महिलाओं के रोजगार के लिए बनाए गए ‘वूमेन गारमेंट फैक्ट्री रोजगार केंद्र’ का उद्घाटन तो दूर, वह केंद्र अभी भी अपने शुरू होने की बाट जोह रहा है, जिसे उन्होंने महापौर की मुख्य उपलब्धि करार दिया है।
जनजीवन और प्रशासनिक व्यवस्था पर प्रभाव
प्रशासनिक बैठकों और जमीनी हकीकत के बीच इस अंतर का सीधा असर राजधानी के आम नागरिकों के जीवन पर पड़ रहा है। जलभराव, रोजगार के साधनों के ठप होने और बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जनता खुद को ठगा महसूस कर रही है। इस तीखे बयान के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
रायपुर नगर निगम में बैठकों की बहुतायत और धरातल पर विकास कार्यों की कमी को लेकर विपक्ष ने सरकार और प्रशासन को घेर लिया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव और बढ़ने की पूरी संभावना है।
(FAQs) अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- रायपुर नगर निगम में बैठकों को लेकर किसने सवाल उठाए हैं?
नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने बैठकों के दौर और धरातल की स्थिति पर सवाल उठाए हैं।
- नेता प्रतिपक्ष ने मुख्य रूप से किस बात पर नाराजगी जताई है?
उन्होंने अधिकारियों द्वारा केवल बैठकें करने और जनता की मूलभूत सुविधाओं की अनदेखी करने पर नाराजगी जताई है।
- मोवा में स्थित केंद्र से जुड़ा प्रमुख मुद्दा क्या है?
हजारों महिलाओं के रोजगार के लिए मोवा में बनाया गया ‘वूमेन गारमेंट फैक्ट्री रोजगार केंद्र’ अभी तक शुरू नहीं हो पाया है।
- जलबोर्ड का गठन कब किया गया था?
जलबोर्ड का गठन जनवरी 2026 में किया गया था, जिसके कार्य अभी तक केवल कार्यालय तक सीमित हैं।
- सिटी डेवलप प्लान कब बनाया गया था?
महापौर द्वारा वर्ष 2025 में पूरे 70 वार्डों के लिए सिटी डेवलप प्लान बनाया गया था जो अभी तक लागू नहीं हुआ है।


