Pt. Ravishankar Shukla University campus with admission office for Tribal Studies MA course
रविवि के एमए इन ट्राइबल स्टडीज पाठ्यक्रम में अब तक एक भी छात्र ने प्रवेश नहीं लिया।

Tribal Studies MA PRSU: पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय (रविवि) के अध्ययनशाला में शैक्षणिक सत्र 2026-27 से शुरू होने वाला Tribal Studies MA पाठ्यक्रम पहले ही वर्ष मुश्किल में पड़ गया है। 20 सीटों वाले इस नए कोर्स में अब तक एक भी छात्र ने प्रवेश नहीं लिया है। इसके चलते मौजूदा सत्र में इसकी पढ़ाई शुरू होने की संभावना लगभग खत्म होती नजर आ रही है।

विश्वविद्यालय ने इस पाठ्यक्रम को भारतीय ज्ञान परंपरा के अंतर्गत शुरू करने का निर्णय लिया था। इसे पहले ही विद्यापरिषद और कार्यपरिषद से मंजूरी मिल चुकी है। चूंकि यह पहला बैच है, इसलिए इसमें ऑफलाइन आवेदन भी स्वीकार किए जा रहे हैं।

14 अगस्त तक प्रवेश का मौका

विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया 14 अगस्त तक जारी रहेगी। यदि इस अवधि में छात्र प्रवेश लेते हैं तो इसी शैक्षणिक सत्र से कक्षाएं शुरू की जा सकती हैं। हालांकि विभाग को फिलहाल ऐसे संकेत नहीं मिल रहे हैं कि बड़ी संख्या में छात्र इस कोर्स में रुचि दिखा रहे हैं।

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करियर को लेकर असमंजस बनी वजह

विश्वविद्यालय के सूत्रों के अनुसार, जनजातीय अध्ययन एमए नया पाठ्यक्रम होने के कारण छात्र इससे जुड़े करियर विकल्पों से परिचित नहीं हैं। यही वजह है कि छात्र इस विषय में प्रवेश लेने से बच रहे हैं। अधिकांश विद्यार्थी ऐसे विषयों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिनमें रोजगार की संभावनाएं अधिक दिखाई देती हैं।

संस्कृत सर्टिफिकेट कोर्स में भी धीमे हैं दाखिले

भारतीय ज्ञान परंपरा के अंतर्गत विश्वविद्यालय ने संस्कृत में सर्टिफिकेट प्रोग्राम भी शुरू किया है। यह पाठ्यक्रम केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के साथ हुए एमओयू के तहत संचालित किया जा रहा है। इस कोर्स में प्रवेश के लिए संस्कृत का बुनियादी ज्ञान आवश्यक है। इसलिए इसमें भी प्रवेश की गति सामान्य से धीमी है। पिछले शैक्षणिक सत्र में इस पाठ्यक्रम में 20 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया था। विभाग को इस बार भी दूसरे बैच के लिए पर्याप्त छात्रों के मिलने की उम्मीद है।

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विभागाध्यक्ष ने क्या कहा?

संस्कृत सर्टिफिकेट प्रोग्राम में अध्यापन के लिए शिक्षक केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली से आते हैं। सफल विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र भी वहीं से जारी किया जाता है। भारतीय ज्ञान परंपरा विभाग के प्रभारी प्रो. रविंद्र ब्रम्हे ने बताया कि जैसे ही विद्यार्थी प्रवेश लेंगे, पाठ्यक्रम शुरू कर दिया जाएगा। फिलहाल ट्राइबल स्टडीज में किसी भी छात्र ने प्रवेश नहीं लिया है।