धरमजयगढ़। जिस कटहल के पकने का लोग सालभर इंतजार करते थे, वही अब धरमजयगढ़ के ग्रामीणों के लिए सिरदर्द बन गया है। वन मंडल में इन दिनों 100 से ज्यादा हाथी विचरण कर रहे हैं। कटहल की तेज खुशबू से खिंचे चले आ रहे हाथी खेत और घरों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इससे बचने के लिए अब ग्रामीण पके कटहल को तोड़कर जमीन में दफनाने को मजबूर हैं।

क्या है पूरा मामला ?
धरमजयगढ़ वन मंडल के तालगांव, अलोला, लिप्ती, पखनाकोट, प्रेमनगर, क्रोंधा, खम्हार सहित कई गांव हाथी प्रभावित हैं। यहां रात होते ही ग्रामीण जागकर पहरा देते हैं। हाथियों के दल जंगल से निकलकर खेतों में घुस रहे हैं और धान समेत अन्य फसलें तहस-नहस कर रहे हैं। कुछ जगहों पर मकानों को भी नुकसान पहुंचा है। लगातार डर की वजह से गांवों में दहशत का माहौल है।
वन विभाग की अपील
DFO जितेंद्र उपाध्याय के नेतृत्व में वन विभाग की टीम लगातार निगरानी कर रही है। विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है:
1. कटहल को खुले में न छोड़ें – उसे जमीन में दफना दें या पानी में बहा दें
2. हाथियों के पास न जाएं – न उकसाएं, न सेल्फी लें
3. तुरंत सूचना दें – हाथी दिखते ही वन विभाग को खबर करें
DFO ने बताया कि मानव-हाथी संघर्ष रोकने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं और इसमें सफलता भी मिल रही है।
FAQ
सवाल 1: हाथी गांव क्यों आ रहे हैं?
जवाब: पके कटहल की तेज गंध से आकर्षित होकर हाथी गांवों की ओर आ रहे हैं।
सवाल 2: ग्रामीण क्या करें?
जवाब: पके कटहल को दफनाएं या बहा दें। रात में सतर्क रहें और हाथियों से दूरी बनाएं।
सवाल 3: कितने हाथी हैं क्षेत्र में?
जवाब: वन विभाग के अनुसार धरमजयगढ़ वन मंडल में अभी 100 से अधिक हाथी विचरण कर रहे हैं।
सवाल 4: नुकसान कहां-कहां हुआ?
जवाब: तालगांव, अलोला, लिप्ती, पखनाकोट समेत कई गांवों में फसल और मकानों को नुकसान।


