रायपुर/कांकेर। छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर खरीदे गए धान में एक बार फिर बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। कांकेर जिले में मिलान के दौरान रिकॉर्ड के मुताबिक 1 लाख 30 हजार टन धान कम पाया गया है। सहकारिता मंत्री केदार कश्यप की समीक्षा बैठक में यह मामला खुलने के बाद विभाग ने जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है और एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया चल रही है।

मंत्री की समीक्षा में खुला 1.30 लाख टन का घोटाला

सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने तीन दिन पहले धान खरीदी और उठाव की समीक्षा बैठक ली थी। इसी दौरान कांकेर जिले में धान उठाव के बाद रिकॉर्ड और वास्तविक उपलब्धता में भारी अंतर मिला।

अधिकारियों के अनुसार खरीदे गए धान में से 1.30 लाख टन धान गायब है। बाजार भाव के हिसाब से यह करोड़ों रुपये का घोटाला है।

सचिव ने की पुष्टि, शुरू हुई एफआईआर की प्रक्रिया

सहकारिता सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना ने कांकेर में धान की कमी की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।

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जिला विपणन अधिकारी ने भी माना कि रिकॉर्ड में 1 लाख 30 हजार टन धान कम है। इसी आधार पर एफआईआर दर्ज कराई जा रही है।

प्रदेश भर में चल रहा मिलान का काम

प्रदेश में खरीदे गए धान का उठाव लगभग पूरा हो चुका है और अब मिलान का कार्य चल रहा है।

रायपुर, बिलासपुर और सरगुजा संभाग में यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। बस्तर संभाग में मिलान जारी है। इसी दौरान कांकेर में यह बड़ी अनियमितता पकड़ी गई।

पिछले साल हुई 750 करोड़ के धान की गड़बड़ी

विभागीय सूत्रों के अनुसार पिछले वर्षों की तुलना में इस बार धान चोरी के मामले कम हुए हैं। मगर पिछले साल करीब 750 करोड़ रुपये की गड़बड़ी सामने आई थी।

इस बार महासमुंद, कबीरधाम, जांजगीर-चांपा समेत कुछ अन्य जिलों में भी अनियमितताएं मिली हैं। धान खरीदी में गड़बड़ी का मुद्दा विधानसभा में भी उठ चुका है और कई कर्मचारियों पर कार्रवाई हो चुकी है।

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सरकार ने कहा है कि नए खरीदी सीजन में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए व्यवस्था को और सख्त किया जाएगा।

FAQ: कांकेर धान घोटाला मामला

सवाल 1. कांकेर में कितना धान गायब मिला ?

रिकॉर्ड के अनुसार 1 लाख 30 हजार टन धान कम पाया गया है।

सवाल 2. मामला कैसे सामने आया ?

सहकारिता मंत्री केदार कश्यप की समीक्षा बैठक और धान उठाव के बाद मिलान के दौरान गड़बड़ी पकड़ी गई।

सवाल 3. अब तक क्या कार्रवाई हुई ?

एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

सवाल 4. पिछले साल कितनी गड़बड़ी थी ?

पिछले साल प्रदेश में करीब 750 करोड़ रुपये की धान चोरी और गड़बड़ी के मामले सामने आए थे।

सवाल 5. सरकार आगे क्या करेगी ?

नए खरीदी सीजन के लिए धान खरीदी व्यवस्था को और सख्त करने की तैयारी है।