12 Jyotirlinga: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना का सबसे पावन समय माना जाता है। इस पूरे माह में देशभर के शिवालयों में विशेष पूजा, रुद्राभिषेक, जलाभिषेक और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव स्वयं इन 12 ज्योतिर्लिंगों में ज्योति स्वरूप में विराजमान हैं। इसलिए सावन के दौरान इनके दर्शन को अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।
भारत के अलग-अलग राज्यों में स्थित ये 12 ज्योतिर्लिंग केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि अपनी वास्तुकला, इतिहास और प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी प्रसिद्ध हैं।
भारत के 12 ज्योतिर्लिंग: स्थान, महत्व और यात्रा मार्ग
- सोमनाथ ज्योतिर्लिंग (गुजरात)
स्थान: गुजरात के गिर सोमनाथ जिले (प्रभास पाटन) में अरब सागर के तट पर स्थित है।
महत्व: यह भारत का पहला ज्योतिर्लिंग माना जाता है।
कैसे पहुंचें: निकटतम एयरपोर्ट जामनगर/राजकोट और रेलवे स्टेशन सोमनाथ/वेरावल है।
- मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग (आंध्र प्रदेश)
स्थान: आंध्र प्रदेश के नंद्याल जिले में श्रीशैलम पर्वत पर कृष्णा नदी के तट के पास।
महत्व: यह ऐसा पवित्र धाम है जहां भगवान शिव और माता पार्वती (भ्रामराम्बा देवी) दोनों की एक साथ पूजा होती है।
कैसे पहुंचें: निकटतम एयरपोर्ट हैदराबाद (210 किमी) और रेलवे स्टेशन मार्कापुर रोड (85 किमी) है।
- महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग (मध्य प्रदेश)
स्थान: मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में रुद्र सागर झील के किनारे।
महत्व: यह एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है। यहां की ‘भस्म आरती’ दुनिया भर में प्रसिद्ध है।
कैसे पहुंचें: निकटतम एयरपोर्ट इंदौर (55 किमी) और रेलवे स्टेशन उज्जैन जंक्शन (2 किमी) है।

- ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग (मध्य प्रदेश)
स्थान: मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में नर्मदा नदी के बीच मंधाता (शिवपुरी) द्वीप पर। यह द्वीप ‘ॐ’ के आकार का है।
महत्व: यहां नर्मदा स्नान और ओंकार पर्वत की परिक्रमा का विशेष धार्मिक महत्व है।
कैसे पहुंचें: निकटतम एयरपोर्ट इंदौर (75 किमी) और रेलवे स्टेशन ओंकारेश्वर रोड (12 किमी) है।
- केदारनाथ ज्योतिर्लिंग (उत्तराखंड)
स्थान: उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में मंदाकिनी नदी के उद्गम क्षेत्र के पास हिमालय में।
महत्व: यह चार धाम और पंच केदार का प्रमुख हिस्सा है, जो पांडवों की कथाओं से जुड़ा है।
कैसे पहुंचें: जॉली ग्रांट एयरपोर्ट (देहरादून) या ऋषिकेश रेलवे स्टेशन से गौरीकुंड तक, फिर आगे 16-18 किमी की पैदल यात्रा।
- भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग (महाराष्ट्र)
स्थान: महाराष्ट्र के पुणे जिले में सह्याद्रि पर्वत श्रृंखला के घने जंगलों में।
महत्व: मान्यता है कि भगवान शिव ने यहां भीम नामक राक्षस का वध किया था। यहां से भीमा नदी का उद्गम होता है।
कैसे पहुंचें: निकटतम एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन पुणे (लगभग 110 किमी) है।
- काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग (उत्तर प्रदेश)
स्थान: उत्तर प्रदेश के वाराणसी (काशी) शहर में पवित्र गंगा नदी के तट पर।
महत्व: काशी को मोक्षदायिनी नगरी कहा जाता है, जहां स्वयं भगवान शिव का निवास माना गया है।
कैसे पहुंचें: लाल बहादुर शास्त्री एयरपोर्ट (वाराणसी) 25 किमी और वाराणसी कैंट स्टेशन 5 किमी दूर है।

- त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग (महाराष्ट्र)
स्थान: महाराष्ट्र के नासिक जिले में ब्रह्मगिरी पर्वत की तलहटी में।
महत्व: यहां ज्योतिर्लिंग में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवों का प्रतीकात्मक स्वरूप विराजमान है। यह गोदावरी नदी का उद्गम स्थल भी है।
कैसे पहुंचें: निकटतम रेलवे स्टेशन नासिक रोड (35 किमी) और एयरपोर्ट मुंबई/नासिक है।
- वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग (झारखंड)
स्थान: झारखंड के देवघर जिले में स्थित है, जिसे ‘बाबा बैद्यनाथ धाम’ भी कहा जाता है।
महत्व: भगवान शिव यहां भक्तों के दुखों का निवारण करने वाले वैद्य स्वरूप में पूजे जाते हैं। सावन में यहां विशाल श्रावणी मेला लगता है।
कैसे पहुंचें: निकटतम एयरपोर्ट देवघर (10 किमी) और रेलवे स्टेशन जसीडीह जंक्शन (7 किमी) है।
- नागेश्वर ज्योतिर्लिंग (गुजरात)
स्थान: गुजरात के देवभूमि द्वारका जिले में द्वारका-ओखा मार्ग के पास।
महत्व: नागेश्वर को नागों के ईश्वर के रूप में पूजा जाता है। परिसर में भगवान शिव की 25 मीटर ऊंची ध्यानमग्न प्रतिमा आकर्षण का केंद्र है।
कैसे पहुंचें: निकटतम रेलवे स्टेशन द्वारका (17 किमी) और एयरपोर्ट जामनगर (130 किमी) है।
- रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग (तमिलनाडु)
स्थान: तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले के पंबन द्वीप पर।
महत्व: मान्यता है कि लंका विजय से पूर्व भगवान श्रीराम ने यहां शिवलिंग की स्थापना कर पूजा की थी। यह दक्षिण भारत के चार धामों में शामिल है।
कैसे पहुंचें: निकटतम रेलवे स्टेशन रामेश्वरम (2 किमी) और एयरपोर्ट मदुरै (170 किमी) है।

- घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग (महाराष्ट्र)
स्थान: महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) जिले में एलोरा गुफाओं के पास।
महत्व: यह भगवान शिव का 12वां और अंतिम ज्योतिर्लिंग माना जाता है।
कैसे पहुंचें: निकटतम एयरपोर्ट व रेलवे स्टेशन छत्रपति संभाजीनगर (30-35 किमी) है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्र1. भारत में कुल कितने ज्योतिर्लिंग हैं और ये किन-किन राज्यों में स्थित हैं?
उत्तर: भारत में कुल 12 ज्योतिर्लिंग हैं, जो महाराष्ट्र (3), मध्य प्रदेश (2), गुजरात (2), उत्तराखंड (1), उत्तर प्रदेश (1), आंध्र प्रदेश (1), तमिलनाडु (1) और झारखंड (1) में स्थित हैं।
प्र2. दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग कौन सा है और इसकी क्या विशेषता है?
उत्तर: मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है। यहां की प्रसिद्ध भस्म आरती और अकाल मृत्यु से रक्षा की मान्यता इसे विशेष बनाती है।
प्र3. किस ज्योतिर्लिंग का संबंध भगवान श्रीराम और रामायण काल से है?
उत्तर: तमिलनाडु स्थित रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग का संबंध भगवान श्रीराम से है, जिन्होंने लंका पर चढ़ाई करने से पहले यहां शिवलिंग की स्थापना कर शिवजी की पूजा की थी।
प्र4. ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग को यह नाम क्यों मिला है?
उत्तर: मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में यह मंदिर जिस द्वीप पर स्थित है, उसका प्राकृतिक आकार अंतरिक्ष या ऊंचाई से देखने पर ‘ॐ’ (ओम्) के समान दिखाई देता है, इसलिए इसे ओंकारेश्वर कहा जाता है।
प्र5. सावन के महीने में बाबा बैद्यनाथ धाम (झारखंड) में कौन सा प्रसिद्ध मेला लगता है?
उत्तर: सावन के महीने में झारखंड के देवघर स्थित वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग में विश्व प्रसिद्ध ‘श्रावणी मेला’ लगता है, जहां लाखों कांवड़िए सुल्तानगंज से गंगाजल लाकर भगवान शिव को अर्पित करते हैं।


