नई दिल्ली। NEET-PG 2025 परीक्षा के लिए क्वालिफाइंग कट-ऑफ परसेंटाइल में कमी किए जाने के निर्णय को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि उसके पूर्व निर्देशों के अनुपालन में NEET-PG परीक्षा प्रणाली की समीक्षा के लिए 12 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है।
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की खंडपीठ को बताया गया कि समिति का उद्देश्य मौजूदा NEET-PG प्रवेश प्रणाली का व्यापक ऑडिट करना, विभिन्न हितधारकों से सुझाव प्राप्त करना, व्यवस्था की कमियों की पहचान करना तथा व्यावहारिक एवं प्रभावी सुधारों की सिफारिश करना है।
केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ऐश्वर्या भाटी ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत डायरेक्टरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (DGHS) द्वारा जारी कार्यालय आदेश प्रस्तुत किया। इसके अनुसार, समिति की अध्यक्षता DGHS के डी. लोवनीश जी. कृष्णा करेंगे, जबकि सहायक महानिदेशक डॉ. प्रवीण कुमार दास सदस्य सचिव होंगे। समिति में नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC), नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA), नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन (NBE) तथा स्वास्थ्य मंत्रालय के अन्य अधिकारियों को शामिल किया गया है।
ASG ने अदालत को बताया कि हितधारकों से सुझाव प्राप्त करने और उनका परीक्षण करने के बाद समिति को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए आठ सप्ताह का समय चाहिए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने समिति को सभी संबंधित पक्षों से सुझाव आमंत्रित कर निर्धारित अवधि के भीतर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।
दरअसल, याचिकाओं में नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन्स इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) द्वारा 13 जनवरी को जारी उस अधिसूचना को चुनौती दी गई है, जिसके तहत NEET-PG 2025 की क्वालिफाइंग कट-ऑफ परसेंटाइल में उल्लेखनीय कमी की गई थी। संशोधित मानदंडों के अनुसार सामान्य वर्ग के लिए कट-ऑफ स्कोर 276 से घटाकर 103 कर दिया गया, जबकि एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के लिए यह 235 से घटाकर माइनस 40 कर दिया गया।
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि इस निर्णय से न्यूनतम योग्यता के मानकों से समझौता होगा और ऐसे अभ्यर्थी भी स्नातकोत्तर चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के पात्र बन जाएंगे, जिनकी योग्यता पर्याप्त नहीं है। उनका कहना है कि इससे चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ-साथ मरीजों की सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है। मामले की अगली सुनवाई विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद की जाएगी।


