CG CM Review Meeting: छत्तीसगढ़ में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की अब हर महीने मुख्यमंत्री स्तर पर समीक्षा होगी। राज्य सरकार ने परियोजनाओं की निगरानी के लिए Project Assessment, Review and Analysis System (पारस) को प्रभावी निगरानी प्रणाली के रूप में लागू किया है।
इसके जरिए जिलों की परफॉर्मेंस की रैंकिंग तैयार की जाएगी और जिन योजनाओं का लाभ समय पर लोगों तक नहीं पहुंचेगा या जिनके क्रियान्वयन में लापरवाही मिलेगी, उनके लिए संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी।
हर महीने होगी राज्यस्तरीय समीक्षा
मुख्यमंत्री ने गुरुवार को मंत्रालय महानदी भवन में पारख पोर्टल के जरिए राज्यस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, सुबोध सिंह, देवेंद्र यादव, राकेश चतुर्वेदी, राहुल शर्मा, कमलेश सिंह, अंकित आनंद, श्याम आंबेडकर सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि जिन विभागों की लापरवाही के कारण योजनाएं प्रभावित होंगी, उनके जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने समय-सीमा के भीतर लंबित मामलों के निराकरण पर विशेष जोर दिया।
हेल्पलाइन में 1.10 लाख शिकायतें, 65 हजार का हुआ समाधान
समीक्षा के दौरान बताया गया कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के संचालन के बाद अब तक 1.10 लाख से अधिक शिकायतें दर्ज की गई हैं। इनमें से 65 हजार से अधिक शिकायतों का निराकरण किया जा चुका है, जबकि करीब 55.29 प्रतिशत शिकायतकर्ताओं ने समाधान पर संतुष्टि जताई है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जिन 27 विभागों में 721 अधिसूचित सेवाएं लोक सेवा गारंटी अधिनियम (पब्लिक सर्विस गारंटी) के तहत संचालित हैं, वहां लंबित मामलों का जल्द से जल्द निपटारा सुनिश्चित किया जाए।
हर पात्र किसान का होगा पंजीयन
मुख्यमंत्री ने एस्ट्रेक्ट पोर्टल के माध्यम से जन-निबंधित पोषण किसान योजना की समीक्षा करते हुए कहा कि यह केवल धान खरीदी तक सीमित व्यवस्था नहीं है। इसका उद्देश्य किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना भी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिलों में विशेष अभियान चलाकर हर पात्र किसान का पंजीयन सुनिश्चित किया जाए, ताकि कोई भी पात्र किसान सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे।
कलेक्टरों की होगी नियमित मॉनिटरिंग
मुख्यमंत्री ने सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए कि वे लंबित प्रकरणों की नियमित समीक्षा करें और तय समय-सीमा के भीतर उनका निराकरण सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों को सरकारी सेवाओं के लिए अनावश्यक परेशानी न हो, इसके लिए जिला प्रशासन को जवाबदेही के साथ काम करना होगा।


