बकरी पालन से रखी सफलता की नींव
धमतरी के छिपली गांव की दीदियों ने बकरी पालन से शुरू करके विविध व्यवसाय कर रहीं हैं।

Women Empowerment: ग्रामीण अंचल की महिलाएं यदि ठान लें, तो सीमित संसाधनों के बल पर भी आत्मनिर्भरता का नया इतिहास लिख सकती हैं। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के नगरी विकासखंड स्थित ग्राम छिपली की महिलाओं ने इसे सच कर दिखाया है। यहाँ की स्वावलंबी महिला स्व-सहायता समूह की दीदियों ने संघर्ष और चुनौतियों को पछाड़ते हुए न केवल अपनी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ की है, बल्कि पूरे प्रदेश में ग्रामीण आजीविका और महिला सशक्तिकरण का एक रोल मॉडल बनकर उभरी हैं।

समूह की अध्यक्ष दुर्गेश नंदनी साहू बताती हैं कि शुरुआत का दौर आसान नहीं था। सबसे पहली और बड़ी चुनौती गाँव की महिलाओं को एकजुट कर सामूहिक कार्य की संस्कृति विकसित करने की थी। आपसी समन्वय और अटूट विश्वास के साथ दीदियों ने पशुपालन विभाग के मार्गदर्शन में बकरी पालन को आजीविका का मुख्य आधार बनाया।

उतार-चढ़ाव और नुकसान का सामना

शुरुआती दिनों में बाजार के उतार-चढ़ाव और नुकसान का भी सामना करना पड़ा, लेकिन महिलाओं ने हार मानने के बजाय प्रबंधन और पशु स्वास्थ्य की बारीकियों को समझा। निरंतर प्रयासों का परिणाम यह है कि आज समूह की प्रत्येक दीदी प्रतिमाह 8 से 10 हजार रुपए की सम्मानजनक आय अर्जित कर रही हैं।

See also  कथित फेक न्यूज मॉनिटरिंग पर भाजपा का कटाक्ष, धूल चेहरे पे थी और आईना साफ करता रहा...

बकरी पालन से मिनी राइस मिल तक

सफलता का स्वाद चखने के बाद छिपली की दीदियों ने खुद को सिर्फ बकरी पालन तक सीमित नहीं रखा। अपनी उद्यमशीलता को नया आयाम देते हुए समूह ने अपनी गतिविधियों का बहुआयामी विस्तार किया।

मखाना और दुग्ध व्यवसाय का स्मार्ट कॉम्बिनेशन

गाँव के तालाब को मखाना उत्पादन के लिए तैयार करने के साथ-साथ गाय व बकरी पालन से दुग्ध व्यवसाय को गति दी। मखाना की फसल कटने के बाद निकलने वाला छिलका और कचरा पशुओं के लिए बेहतरीन और पौष्टिक चारा बनता है, जिससे चारे की लागत कम होती है और दूध उत्पादन का मुनाफा बढ़ जाता है।

वैज्ञानिक खेती और स्थानीय व्यवसाय: दलहन-तिलहन फसलों के साथ फलदार वृक्षों की वैज्ञानिक खेती अपनाई। गाँव में मिनी राइस मिल और कैंटीन संचालन शुरू कर दैनिक आय के पक्के स्रोत विकसित किए।

प्रशासनिक संबल, राष्ट्रीय पहचान और सम्मान

जिला प्रशासन और पशुपालन विभाग का तकनीकी सहयोग दीदियों के लिए संबल बना। धमतरी कलेक्टर के अनुसार, गांवों में स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ना ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ को मजबूत करता है।

See also  विधायक अरूण वोरा को आचार संहिता के उल्लंघन पर जिला निर्वाचन अधिकारी ने थमाया नोटिस

समूह के इस अनुकरणीय मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है। पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के हाथों सम्मानित होना इन महिलाओं के अटूट संघर्ष और सामूहिक संकल्प का सबसे बड़ा प्रमाण है। कभी सपनों को लेकर असमंजस में रहने वाली ये दीदियां आज न केवल अपने परिवारों का आर्थिक आधार मजबूत कर रही हैं, बल्कि पूरे राज्य के लिए स्वावलंबन और महिला सशक्तिकरण की जीवंत मिसाल बन चुकी हैं।

FAQ

प्रश्न 1: ग्राम छिपली किस जिले और विकासखंड के अंतर्गत आता है?

उत्तर: ग्राम छिपली छत्तीसगढ़ राज्य के धमतरी जिले के नगरी विकासखंड के अंतर्गत आता है।

प्रश्न 2: छिपली महिला स्व-सहायता समूह ने अपनी आजीविका की शुरुआत किस व्यवसाय से की थी?

उत्तर: समूह ने पशुपालन विभाग के मार्गदर्शन में बकरी पालन से अपनी आजीविका की शुरुआत की थी।

प्रश्न 3: मखाना उत्पादन और पशुपालन को एक साथ करने से क्या लाभ होता है?

See also  बस्तर में ब्लास्ट, नक्सलियों ने आईईडी बम से जवानों पर किया हमला,दो माओवादी ढेर

उत्तर: मखाना की फसल कटने के बाद बचा हुआ छिलका व कचरा पशुओं के लिए पौष्टिक चारे का काम करता है, जिससे पशु चारे की लागत घटती है और दुग्ध व्यवसाय का मुनाफा बढ़ता है।

प्रश्न 4: छिपली महिला समूह की वर्तमान में मुख्य आर्थिक गतिविधियाँ कौन-कौन सी हैं?

उत्तर: बकरी व गाय पालन (दुग्ध व्यवसाय), मखाना उत्पादन, दलहन-तिलहन व फलदार वृक्षों की खेती, मिनी राइस मिल का संचालन और कैंटीन संचालन।

प्रश्न 5: इस समूह की प्रत्येक महिला सदस्य की वर्तमान मासिक आय कितनी है?

उत्तर: समूह की प्रत्येक दीदी वर्तमान में प्रतिमाह लगभग ₹8,000 से ₹10,000 की सम्मानजनक आय अर्जित कर रही हैं।