Joint Bank Account Insurance Claim: राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने संयुक्त बैंक खाते से जुड़े दुर्घटना बीमा दावों को लेकर अहम फैसला सुनाया है। आयोग ने कहा है कि यदि जॉइंट बैंक अकाउंट से दुर्घटना बीमा का प्रीमियम जमा किया गया है तो दुर्घटना में किसी भी एक खाताधारक की मृत्यु होने पर पूरी बीमा राशि का दावा किया जा सकता है।
इसी आधार पर आयोग ने बीमा कंपनी की आपत्ति खारिज करते हुए दुर्ग निवासी मीना बाई चेलिक के पक्ष में फैसला सुनाया।
दूसरे खाताधारक होने के आधार पर खारिज किया गया था क्लेम
अधिवक्ता राजेश भवनानी के अनुसार, भिलाई-3 निवासी स्वर्गीय शंकर लाल चेलिक और उनकी पत्नी मीना बाई चेलिक का जिला सहकारी केंद्रीय बैंक में संयुक्त बचत खाता था। इसी खाते से लिबर्टी वीडियोकॉन जनरल इंश्योरेंस की ग्रुप पर्सनल एक्सीडेंट पॉलिसी के लिए 65 रुपये का प्रीमियम काटा गया था। इस पॉलिसी के तहत 5 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा कवर उपलब्ध था। 12 सितंबर 2014 को रायपुर में काम के दौरान गिरने से शंकर लाल चेलिक के सिर में गंभीर चोट लगी और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इसके बाद मीना बाई ने बीमा दावा किया, लेकिन बीमा कंपनी ने यह कहते हुए क्लेम खारिज कर दिया कि मृतक संयुक्त खाते के द्वितीय खाताधारक थे।
जिला आयोग और राज्य आयोग के फैसले अलग-अलग रहे
बीमा दावा खारिज होने के बाद मीना बाई ने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई। जिला आयोग ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी को 5 लाख रुपये देने का आदेश दिया। हालांकि, राज्य उपभोक्ता आयोग ने बाद में इस राशि को घटाकर 2.50 लाख रुपये कर दिया। इसके बाद मीना बाई और बीमा कंपनी दोनों ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में अपील की।
NCDRC ने बहाल किया जिला आयोग का फैसला
सुनवाई के दौरान NCDRC ने कहा कि बीमा पॉलिसी में कहीं भी यह स्पष्ट नहीं था कि बीमा सुरक्षा केवल मुख्य खाताधारक तक सीमित रहेगी या संयुक्त खाते के प्रत्येक खाताधारक के लिए अलग-अलग प्रीमियम देना होगा। आयोग ने कहा कि यदि पॉलिसी की शर्तों में अस्पष्टता है तो उसका लाभ उपभोक्ता को मिलना चाहिए। साथ ही बैंक रिकॉर्ड में किसी तकनीकी त्रुटि का नुकसान भी उपभोक्ता पर नहीं डाला जा सकता। इसी आधार पर आयोग ने राज्य आयोग का आदेश रद्द करते हुए जिला आयोग का फैसला बहाल कर दिया। यह फैसला संयुक्त बैंक खाताधारकों के दुर्घटना बीमा दावों से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बीमा कंपनी को क्या निर्देश दिए गए?
- 5 लाख रुपये की बीमा राशि
- निर्धारित ब्याज
- 50 हजार रुपये क्षतिपूर्ति
- और 5 हजार रुपये वाद व्यय का भुगतान करे


