Alwar RAS officer Jitendra Singh Naruka making eco-friendly Ganesha idols out of cow dung.
RAS officer Jitendra Singh Naruka crafting eco-friendly Ganesha idols from cow dung during his spare time in Alwar.

Alwar RAS Officer: नगर विकास न्यास अलवर के भूमि अवाप्ति अधिकारी और RAS अधिकारी जितेंद्र सिंह नरूका इन दिनों सरकारी काम के साथ अपनी कला और पर्यावरण संरक्षण के संदेश को भी आगे बढ़ा रहे हैं। गणेश चतुर्थी से पहले वह खाली समय में गोबर से इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमाएं तैयार कर रहे हैं।

अब तक करीब 100 प्रतिमाएं बनाई जा चुकी हैं। इन प्रतिमाओं को बेचने के बजाय वह परिवार और दोस्तों को जनजागरूकता के उद्देश्य से भेंट कर रहे हैं।

बचपन से चित्रकारी का शौक, अब बना पर्यावरण संदेश का जरिया

जितेंद्र सिंह नरूका ने बताया कि उन्हें बचपन से ही चित्रकारी का शौक रहा है। खाली समय में वह अलग-अलग तरह के चित्र बनाते रहे हैं। इसी शौक को उन्होंने अब पर्यावरण संरक्षण से जोड़ दिया है। उनके मन में घर पर गोबर से इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमा बनाने का विचार आया। इसके बाद उन्होंने खुद प्रतिमाएं तैयार करना शुरू किया। प्रतिमाओं पर हाथ से आकर्षक चित्रकारी भी की जा रही है।

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पूजा के बाद विसर्जन की जगह पौधों के पास रख सकेंगे प्रतिमा

नरूका के मुताबिक त्योहारों में प्रतिमाओं की पूजा के बाद उन्हें नदी या झील में विसर्जित किया जाता है। उनका कहना है कि दूसरी धातुओं से बनी प्रतिमाओं के विसर्जन से जल प्रदूषण बढ़ सकता है। गोबर से बनी प्रतिमा के साथ ऐसी जरूरत नहीं होगी। पूजा के बाद इसे घर के गमले, पेड़, लॉन या सार्वजनिक पार्क में पेड़ के नीचे रखा जा सकता है।

समय के साथ प्राकृतिक रूप से हो जाएगा अपघटन

अधिकारी के अनुसार गोबर से बनी प्रतिमाएं समय के साथ प्राकृतिक रूप से अपघटित हो जाएंगी। इससे रासायनिक प्रदूषण के बजाय मिट्टी को जैविक उर्वरक मिलने और पेड़ों की वृद्धि में मदद मिलने की बात उन्होंने कही। इसी सोच के साथ उन्होंने गणेश चतुर्थी से पहले गोबर से प्रतिमाएं बनाने का फैसला लिया। सरकारी काम में व्यस्त रहने के बावजूद वह अपने खाली समय में इन्हें तैयार कर रहे हैं।

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100 प्रतिमाएं तैयार, बेचने के बजाय लोगों को दे रहे

जितेंद्र सिंह नरूका ने बताया कि अब तक करीब 100 इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमाएं तैयार की जा चुकी हैं। इनका उद्देश्य बिक्री करना नहीं, बल्कि लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। परिवार और मित्रों को ये प्रतिमाएं भेंट की जा रही हैं। लोगों की सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने के बाद उन्होंने आने वाले समय में अलग-अलग त्योहारों के लिए भी ऐसी प्रतिमाएं बनाने का फैसला लिया है। इनमें श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के लिए कृष्ण प्रतिमा, दुर्गा पूजा के लिए दुर्गा प्रतिमा और गोवर्धन पूजा के लिए छोटी आकर्षक प्रतिमाएं शामिल हैं।

मुल्तानी मिट्टी और लकड़ी के बुरादे से तैयार कर रहे प्रतिमाएं

अधिकारी ने बताया कि गणेश प्रतिमाएं तैयार करने में मुल्तानी मिट्टी, चिपकने वाला पदार्थ और लकड़ी के बुरादे का इस्तेमाल किया गया है। प्रतिमाओं का वजन कम है और इन्हें हाथ से तैयार किया जा रहा है।

5 FAQs

1. गोबर से गणेश प्रतिमा कौन बना रहा है?
अलवर नगर विकास न्यास के भूमि अवाप्ति अधिकारी और RAS अधिकारी जितेंद्र सिंह नरूका।

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2. अब तक कितनी प्रतिमाएं बनाई गई हैं?
करीब 100 इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमाएं तैयार की जा चुकी हैं।

3. इन प्रतिमाओं को बेचने का उद्देश्य है?
नहीं। प्रतिमाएं परिवार और मित्रों को जनजागरूकता के उद्देश्य से भेंट की जा रही हैं।

4. गोबर की प्रतिमा का पूजा के बाद क्या किया जा सकता है?
इसे गमले, पेड़, लॉन या सार्वजनिक पार्क में पेड़ के नीचे रखा जा सकता है।

5. प्रतिमा बनाने में किन चीजों का इस्तेमाल किया गया है?
मुल्तानी मिट्टी, चिपकने वाला पदार्थ और लकड़ी का बुरादा इस्तेमाल किया गया है।