टीआरपी डेस्क। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दोनों चरणों का रण अब खत्म हो चुका है। पहले चरण में जहां 93.19% की ऐतिहासिक वोटिंग ने सबको हैरान किया, वहीं दूसरे चरण में भी करीब 91.66% मतदाताओं ने पोलिंग बूथ पर पहुंचकर नया रिकॉर्ड बना दिया है। रायपुर से लेकर दिल्ली तक के गलियारों में अब बस एक ही चर्चा है इतनी भारी वोटिंग किसके पक्ष में जाएगी? क्या ममता बनर्जी अपनी लक्ष्मी भंडार योजना के दम पर वापसी करेंगी या बीजेपी का सोनार बांग्ला का नारा कमाल दिखाएगा?

भवानीपुर में कांटे की टक्कर: सुवेंदु बोले- परिवर्तन तय

इस चुनाव का सबसे बड़ा केंद्र भवानीपुर रहा, जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और बीजेपी के कद्दावर नेता सुवेंदु अधिकारी के बीच सीधी भिड़ंत है। टीम जब ग्राउंड पर पहुंची, तो वहां का माहौल काफी तनावपूर्ण दिखा। सुवेंदु अधिकारी ने मतदान के बाद दावा किया कि जनता बदलाव चाहती है और इस बार भवानीपुर से ही दीदी की विदाई शुरू होगी। वहीं, ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर हमला बोलते हुए कहा कि उनके कार्यकर्ताओं को परेशान किया जा रहा है, लेकिन बंगाल की जनता डरने वाली नहीं है।

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बमबाजी और हिंसा के बीच भी नहीं थमे कदम

दूसरे चरण की 142 सीटों पर मतदान के दौरान बंगाल के कई हिस्सों से हिंसा की खबरें आईं। नदिया के चापरा और दक्षिण 24 परगना के भांगड़ में जबरदस्त झड़पें हुईं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, कई जगहों पर बमबाजी और पोलिंग एजेंटों को डराने-धमकाने की शिकायतें मिली हैं। हालांकि, चुनाव आयोग ने करीब 2400 कंपनियों की तैनाती कर सुरक्षा के पुख्ता दावे किए थे। भारी सुरक्षा बलों की मौजूदगी ने शायद लोगों को घर से निकलने का हौसला दिया, जिसका नतीजा रिकॉर्ड मतदान के रूप में सामने है।

महिला वोटर बनीं गेम चेंजर?

ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान एक बात साफ दिखी इस बार पोलिंग बूथों पर महिलाओं की लंबी कतारें थीं। एक तरफ ममता बनर्जी की कल्याणकारी योजनाएं हैं, तो दूसरी तरफ आरजी कर कांड के बाद महिला सुरक्षा का बड़ा मुद्दा। पानिहाटी में जिस तरह का जनाक्रोश दिखा, उसने साफ कर दिया है कि बंगाल की नारी अब सिर्फ लाभार्थी नहीं बल्कि एक निर्णायक की भूमिका में है। क्या ये महिलाएं दीदी का साथ देंगी या सुरक्षा और न्याय के लिए बीजेपी के पक्ष में बटन दबाएंगी, यही इस चुनाव का सबसे बड़ा सस्पेंस है।

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4 मई को खुलेगा किस्मत का पिटारा

अब सबकी नजरें 4 मई की सुबह पर टिकी हैं। बंगाल की 294 सीटों का फैसला उस दिन होगा। एग्जिट पोल के आंकड़े भी दोफाड़ नजर आ रहे हैं कोई बीजेपी को बढ़त दे रहा है तो कोई टीएमसी की वापसी की भविष्यवाणी कर रहा है। लेकिन एक बात तो तय है, बंगाल ने इस बार लोकतंत्र के उत्सव में हिस्सा लेकर यह साबित कर दिया है कि असली ताकत जनता के हाथ में ही है।