Completion Of Purkhauti Samman Yatra - जयस्तंभ चौक में हुई बीजेपी की पुरखौती सम्मान यात्रा संपन्न
Completion Of Purkhauti Samman Yatra - जयस्तंभ चौक में हुई बीजेपी की पुरखौती सम्मान यात्रा संपन्न

टीआरपी डेस्क

रायपुर। शहीद वीर नारायण सिंह की जन्मस्थली से निकली पुरखौती सम्मान यात्रा का समापन आज देर शाम रायपुर के जयस्तंभ चौक में हुआ। शाम 7:30 बजे जय स्तंभ चौक पर यात्रा का जोशीला स्वागत बीजेपी ने किया। इस मौके पर भाजपा राष्ट्रीय सचिव ओम प्रकाश धुर्वे, प्रदेश महामंत्री केदार कश्यप, पूर्व मंत्री महेश गागड़ा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के प्रदेश के अध्यक्ष विकास मरकाम मौजूद थे

आदिवासी पुरखौती सम्मान यात्रा के शहीद वीर नारायण सिंह जी के जन्मस्थली से निकली इस यात्रा का सफल समापन उनके शहादत स्थल जयस्तंभ चौक पर हुई। समापन अवसर पर भाजपा के राष्ट्रीय सचिव ओमप्रकाश धुर्वे, भाजपा के प्रदेश महामंत्री केदार कश्यप एवम पूर्व मंत्री महेश गागड़ा जी की उपस्थिति में शहीद वीरनारायण सिंह जी को श्रद्धा सुमन अर्पित किया गया। यात्रा के नेतृत्वकर्ता अजजा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष विकास मरकाम ने इस यात्रा में जुड़े सभी कार्यकर्ताओं पदाधिकारियों गणमान्य नागरिकों बुजुर्गों और छत्तीसगढ़ के युवा भाइयों को धन्यवाद दिया।

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यात्रा के बारे में कहा कि प्रदेश की सबसे विशाल यात्रा में से एक थी जोकि हमारे आदिवासी पुरखों के योगदानो को याद करते हुए निकाला गया। विकास मरकाम ने कहा यह यात्रा ऐतिहासिक रही। छत्तीसगढ़ की जनमानस लंबे समय तक इस यात्रा को याद रखेगी और निश्चित रूप से यह यात्रा महान आदिवासी पुरखों के आदर्शो, स्वप्न और छत्तीसगढ़ के प्रगति के प्रति हम सभी को प्रेरित करती रहेगी

भारतीय जनता पार्टी अनुसूचित जनजाति मोर्चा द्वारा निकाली गई पुरखौती सम्मान यात्रा रायपुर के जयस्तंभ चौक पर विराम हुई। इस यात्रा की शुरुआत 9 जून से की गई थी शहीद वीर नारायण सिंह की जन्म स्थली सोनाखान जिला बलौदा बाजार से निकलकर यह यात्रा प्रदेश अनुसूचित जनजाति मोर्चा अध्यक्ष विकास मरकाम के नेतृत्व में रायपुर संभाग के सभी जिलों से गुजरी। यह यात्रा बलौदा बाजार, महासमुंद, गरियाबंद, धमतरी दुर्ग और रायपुर जिलों में निकाली गई।

आदिवासी पुरखौती सम्मान यात्रा छत्तीसगढ़ के पांच आदिवासी महापुरुषों के जन्मस्थली से निकलकर जिला मुख्यालयों तक पहुंची। अजजा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष ने जानकारी देते हुए कहा कि यह यात्रा राजनीतिक यात्रा नहीं थी बल्कि एक सामाजिक यात्रा थी जिसमें छत्तीसगढ़ के आदिवासी महापुरुषों की भारतीय स्वतंत्रता संग्राम, छत्तीसगढ़ के नवनिर्माण में योगदान और आदिवासी संस्कृति परंपरा को संरक्षित करने में योगदानों को जन-जन तक पहुंचाया गया।

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