0 एक दर्जन शिक्षकों के अलावा कुल 6 विभागों में हैं कार्यरत
0 सभी ने बहरेपन की समस्या बताकर बनवाया फेक सर्टिफिकेट
मुंगेली। छत्तीसगढ़ का मुंगेली एक ऐसा जिला है, जहां से सैकड़ों लोग फर्जी दिव्यांगता सर्टिफिकेट के सहारे सरकारी नौकरी कर रहे हैं, इनमें सर्वाधिक बहरे हैं और उनमें से भी राजपूत सरनेम के लोग सबसे ज्यादा हैं। दिव्यांग सेवा संघ के लंबे संघर्ष के बाद ऐसे संदेहियों का मेडिकल कराया जा रहा है। शुरुआती तौर पर 27 कर्मचारी-अधिकारी संदेही दिव्यांगों की सूची जारी करते हुए कलेक्टर ने विभागों को जानकारी अपडेट करने को लिखा है।
दरअसल मुंगेली जिले में फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट के सहारे सरकारी नौकरी दिलाने वाला गिरोह लंबे समय से सक्रिय है। इसी गिरोह का कमाल है कि फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट के सहारे बड़ी संख्या में लोगों को अलग-अलग विभागों में सरकारी नौकरी दिला दी है। ऐसे कई लोगों को अपना मेडिकल फिर से राज्य बोर्ड में कराने का निर्देश दिया गया है, लेकिन कई लोगों ने अब तक अपना मेडिकल नहीं कराया है। कलेक्टर मुंगेली ने विभाग प्रमुखों को पत्र लिखकर कर्मचारियों के खिलाफ कार्यवाही को लेकर अब तक की गई प्रक्रिया से अवगत कराने को कहा है।
कलेक्टर ने क्या दिया है निर्देश
कलेक्टर मुंगेली ने अपने पत्र में लिखा है कि आपके कार्यालय से दिव्यांगता प्रमाण पत्र के आधार पर शासकीय नौकरी कर रहे अधिकारियों/कर्मचारियों की संलग्न सूची अनुसार नाम प्राप्त हुआ है, जिस पर कार्यवाही करते हुए संयुक्त संचालक एवं अधीक्षक, सिम्स चिकित्सालय बिलासपुर, छत्तीसगढ़ एवं संयुक्त संचालक एवं अधीक्षक, डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर (छ०ग०) को नियमानुसार जांच हेतु पत्र भेजा गया था।
कलेक्टर ने लिखा है कि यह ध्यान में आया है कि कुछ कर्मचारियों के द्वारा उक्त पत्र के विरूद्ध उच्च न्यायालय बिलासपुर में याचिका दायर किया गया है एवं कुछ कर्मचारियों का मेडिकल जांच हुआ है तथा कुछ कर्मचारी मेडिकल जांच में उपस्थित नहीं हुएं। अतः आप संलग्न सूची अनुसार अपने विभाग से संबंधित अधिकारी/कर्मचारी का दिव्यांगता की मेडिकल जांच से संबंधित अद्यतन जानकारी से तत्काल अवगत कराएं।
कलेक्टर ने आधा दर्जन विभाग प्रमुखों को लिखे पत्र में इन कर्मचारियों की सूची के साथ विभाग की सूची भी जारी कर दी है, जहां ये फर्जी दिव्यांगत प्रमाण पत्र के सहारे नौकरी कर रहे हैं। ये है उनकी सूची :


हाईकोर्ट पहुंच गए संदेही दिव्यांग
दिव्यांगता सर्टिफिकेट को सिम्स व डा भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय द्वारा मेडिकल सर्टिफिकेट को फर्जी करार देने के बाद कुछ कर्मचारियों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दी है। कलेक्टर ने अपने पत्र में इस बात का भी हवाला दिया है। कलेक्टर ने अपने पत्र में जानकारी दी है कि कुछ कर्मचारियों का मेडिकल जांच हुआ है तथा कुछ कर्मचारी मेडिकल जांच में उपस्थित नही हुए।
बहरे कैसे हो गए सभी कर्मचारी
संदेही दिव्यांगों में गौर करने वाली बात यह है कि ऐसे सभी 27 शासकीय सेवक बहरे हैं। यानी सभी ने श्रवण बाधित मेडिकल सर्टिफिकेट हासिल किया है। इससे साफ हो रहा है कि जिले में ऐसा गिरोह सक्रिय है जो सिम्स से फर्जी दिव्यांगता, वह भी श्रवण बाधित सर्टिफिकट बनवा रहा है।
यह भी अजीबो-गरीब संयोग है कि फर्जी दिव्यांग के संदेही 27 में 9 कर्मी राजपूत हैं। एक जिले में एक ही जाति के इतने लोग बहरेपन के शिकार हैं। कलेक्टर द्वारा जारी सूची पर गौर करने से एक और बात अजीब लगी, सबसे ज्यादा 11 लोग शिक्षा विभाग में नौकरी कर रहे हैं। 10 श्रवण बाधित लेक्चरर हैं और एक सहायक शिक्षक। वहीँ 10 ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी भी हैं। दरअसल पूर्व में सस्पेंड अफसर गुलाब सिंह राजपूत पर यह आरोप लगते रहे हैं कि उसने ही अधिकांश लोगों का फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट बनवाया है। इसने खासकर अपने रिश्तेदारों का फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर उन्हें नौकरी दिलाई है। इसलिए ज्यादातर फर्जी दिव्यांग राजपूत सरनेम वाले हैं।
बहरहाल संदेही दिव्यांग अफसर-कर्मियों द्वारा खुद के बचाव के लिए जो खेल किया जा रहा है, उससे कैसे निपटा जाये, मुंगेली के कलेक्टर इसी जुगत में लगे हुए है। इसी वजह से उन्होंने संदेही दिव्यांगों की सूची भेजकर इनकी लेटेस्ट जानकारी मंगाई है। अब देखना है कि जानकारी आने के बाद कलेक्टर क्या कार्यवाही करते हैं।


