कोरबा। वन विभाग के पौधारोपण कार्य में बड़ा घोटाला उजागर हुआ है। वर्ष 2019-20 में कैम्पा मद से स्वीकृत 10 करोड़ की योजना के तहत कराए गए पौधारोपण में भारी अनियमितता सामने आई है। यह घोटाला पहली बार जुलाई 2024 में उजागर हुआ था। अब एक साल बाद जांच पूरी होने के बाद 45.32 लाख रुपए की वसूली की अनुशंसा की गई है।

पाली SDO चंद्रकांत टिकरिहा के नेतृत्व में गठित जांच दल की रिपोर्ट में यह साफ हुआ कि मध्यप्रदेश से मजदूर बुलाकर पौधारोपण का महज दिखावा किया गया। मौके पर न पौधे थे, न सुरक्षा व्यवस्था। बोरवेल तक बिना बिजली कनेक्शन के खुदवा दिए गए थे।

इनसे होगी वसूली

  • एआर बंजारे (रिटायर्ड SDO ): ₹11.33 लाख
  • धर्मेन्द्र चौहान (रेंजर): ₹15.86 लाख
  • एसएस तिवारी (वनपाल): ₹11.33 लाख
  • दिलीप ओरेकरा (वन रक्षक): ₹18,568
  • सुरेश यादव (वन रक्षक): ₹1.21 लाख
  • एपी सोनी: ₹4.50 लाख
  • एके शुक्ला: ₹89,983

घोटाले में सामने आई मुख्य बातें

यह परियोजना कुल 10 करोड़ की लागत की थी जिसमें से अब तक 5.50 करोड़ खर्च किए जा चुके हैं। इस परियोजना के तहत कुल 265 हेक्टेयर भूमि पर पौधारोपण किया जाना था, लेकिन भूमि का रकबा ही कम पाया गया। अतिक्रमण वाली जमीन को भी परियोजना में शामिल कर दस्तावेजों में पेस किया गया। इस मामले की गहन जांच में फिलहाल मौके से केवल 20-30% पौधे ही जीवित मिले हैं। फेंसिंग, पाइपलाइन, पंप, बिजली कनेक्शन जैसी व्यवस्थाएं अधूरी और खराब पाई गईं हैं।

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इन पौधों का किया था रोपण

आंवला, जामुन, नीम, करंज, सागौन, सीरत, सरई, कौहा, महुआ, बीजा समेत कुछ अन्य पौधे भी लगाए गए थे। 150 हेक्टेयर में 88,000 पौधों का रोपण किया गया था। और आज 3 साल बाद तकरीबन 75-80% पौधे बचे ही नहीं हैं।

पूरे मामले की जांच रिपोर्ट राज्य शासन को सौंप दी गई है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शासन दोषियों पर कब और क्या कार्रवाई करता है। वन विभाग की इस लापरवाही ने न केवल सरकारी धन का दुरूपयोग किया, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की कोशिशों को भी गहरा नुकसान पहुंचाया है।