टीआरपी डेस्क। Rupee vs Dollar : भारतीय रुपया लगातार अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होता जा रहा है। इस गिरावट का प्रमुख कारण भारत और अमेरिका के बीच चल रहा टैरिफ विवाद हो सकता है। ताजा आंकड़ों के अनुसार रुपया 36 पैसे की गिरावट के साथ 88.47 पर पहुंच गया है, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है।

विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी टैरिफ के चलते विदेशी निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है। इस वर्ष अब तक उन्होंने भारतीय शेयर और ऋण बाजार से 11.7 अरब डॉलर की पूंजी निकाली है। यही वजह है कि एशिया के अन्य देशों की तुलना में रुपया सबसे कमजोर मुद्रा बनकर उभरा है।

Rupee vs Dollar : टैरिफ का असर सिर्फ मुद्रा बाजार पर ही नहीं, बल्कि भारत के व्यापारिक परिदृश्य पर भी पड़ा है। निर्यातकों को नए ऑर्डर मिलने में संकोच का सामना करना पड़ रहा है, जबकि आयातक मुद्रा की अस्थिरता से बचने के लिए हेजिंग की लागत बढ़ा रहे हैं। इससे डॉलर की मांग बढ़ गई है और रुपये पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है।

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भारतीय रिजर्व बैंक लगातार मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप कर रहा है ताकि अस्थिरता को नियंत्रित किया जा सके। हालांकि, आरबीआई का उद्देश्य किसी निश्चित स्तर को बनाए रखना नहीं है, बल्कि बाजार की घबराहट को कम करना है। बैंक डॉलर की बिकवाली के ज़रिये विनिमय दर में स्थिरता लाने की कोशिश कर रहा है।

नवीन कुमार साहू को पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में 5 वर्ष से अधिक का अनुभव है। उन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से Bachelor of Science (Electronic Media) और Master of Science (Electronic Media) की डिग्री हासिल की है। उन्होंने राजधानी रायपुर के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें छत्तीसगढ़, राष्ट्रीय समाचार, राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन का अनुभव है। वे तथ्यपरक, विश्वसनीय और SEO-अनुकूल समाचार एवं लेख तैयार करने में विशेषज्ञता रखते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक सटीक और उपयोगी जानकारी सरल भाषा में पहुंचाना है।