टीआरपी। Chhath festival : बिहार, झारखंड के प्रमुख छठ महापर्व के चार दिवसीय उत्सव की शुरुआत 25 अक्टूबर को नहाय खाय परंपरा निभाने के साथ होगी। दूसरे दिन 26 अक्टूबर को खरना यानी खीर-रोटी खाने की रस्म निभाई जाएगी। तीसरे दिन27 अक्टूबर को अस्त होते सूर्य देव को अर्घ्य देने हजारों की संख्या में श्रद्धालु तालाब, नदी के घाट पर उमड़ेंगे। अंतिम दिन 28 अक्टूबर को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के पश्चात ठेठुआ का प्रसाद ग्रहण कर लगभग 40 घंटे से किए जा रहे निर्जला व्रत का पारणा किया जाएगा।

छठ महापर्व आयोजन समिति महादेवघाट रायपुर के नेतृत्व में होने वाले छठ महापर्व की तैयारियां अंतिम दौर में है। आयोजन समिति के अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने बताया कि समिति ने इस वर्ष छठ पूजा भव्यता और उत्साह से मनाने का निर्णय लिया है। छठ पूजा रायपुर, बिलासपुर, भिलाई-दुर्ग, कोरबा, बस्तर एवं अन्य शहरों में बड़े धूम-धाम से मनाया जाता है। रायपुर में छठ पूजा 50 से अधिक स्थानों जैसे खारुन नदी के महादेव घाट, व्यास तालाब और अन्य तालाबों के किनारे मनाया जाएगा। नवा रायपुर अटल नगर में भी झांझ तालाब के किनारे छठ पूजा का आयोजन किया जाएगा।

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मुंबई के कलाकार देंगे प्रस्तुति

27 अक्टूबर की शाम महादेव घाट पर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा । अंतर्राष्ट्रीय लोक गायिका स्वाती मिश्रा (मुंबई) के द्वारा छठ गीतों के प्रस्तुति दी जाएगी। लोकधारा के मशहूर कलाकार तिलक राजा साहू और केशरी साहू के द्वारा छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति दी जाएगी । सोनाली एवं तरुण चोपड़ा टीम, प्रयागराज के द्वारा नृत्य नाटिका की प्रस्तुति दी जाएगी। इससे पूर्व अस्त होते सूर्य देव को अर्घ्य देकर महाआरती की जाएगी।

स्वच्छता का प्रतीक पर्व

समिति के सदस्यों ने बताया कि छठ महापर्व स्वच्छता का सबसे बड़ा प्रतीक है। वर्तमान में भारत सरकार के द्वारा स्वच्छता का कार्यक्रम चलाया जा रहा है जबकि छठ महापर्व प्राचीन काल से ही स्वच्छता का संदेश देता आ रहा है। इस पर्व पर घर-घर में शुद्ध ठेठुआ का प्रसाद बनाया जाता है जिसे सूर्य भगवान को भोग लगाया जाता है। सड़क एवं घाटों की सफाई की जाती है।

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सूर्यास्त और सूर्योदय पर अर्घ्य

छठ पर्व दुनिया का मात्र एक पर्व है। जिसमें डूबते सूर्य एवं उगते सूर्य की पूजा की जाती है। छठ पर्व को षष्ठी पूजा एवं सूर्य षष्ठी व्रत के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व कार्तिक शुक्ल पक्ष के षष्ठी को मनाया जाने वाला एक हिन्दू पर्व है। सूर्याेपासना का यह अनुपम लोकपर्व मुख्य रूप से पूर्वी भारत के बिहार, झारखण्ड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और नेपाल के तराई क्षेत्रों में मनाया जाता है।

विदेशों में भी निभा रहे परंपरा

छठ पूजा सूर्य और उनकी बहन छठी मइया को समर्पित है। त्यौहार और व्रत के अनुष्ठान कठोर हैं और चार दिनों की अवधि में मनाए जाते हैं। इनमें पवित्र स्नान, निर्जला व्रत, लंबे समय तक पानी में खड़ा होना और प्रसाद, प्रार्थना और सूर्य देवता को अर्घ्य देने की परंपरा निभाई जाती है। बिहार एवं पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोग जिस देश एवं राज्यों में जाकर बसे हैं, वहां अपनी संस्कृति को बचाए हुए हैं। छठ महापर्व नेपाल, फिजी, मॉरिशस, सूरीनाम, गुयाना एवं अन्य देशों में भी मनाया जाता है।

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घाट की तैयारियों में जुटे

इस अवसर पर उप प्रमुख कन्हैया सिंह, सन्तोष सिंह, प्रचार-प्रसार सचिव ब्रजेश सिंह, सह सचिव राकेश सिंह, कोषाध्यक्ष सुनील सिंह, रवींद्र सिंह, मुक्तिनाथ पांडे, शशि सिंह, परमानंद सिंह, रामकुमार सिंह, सत्येन्द्र सिंह गौतम, अजय शर्मा, वेद नारायण सिंह कुशवाहा, जयंत सिंह, जय प्रकाश सिंह आदि तैयारियों में जुटे हैं।