धरमजयगढ़ (रायगढ़)। धरमजयगढ़ अंचल में इन दिनों माहौल काफी गरम है। एक तरफ प्रशासन और कंपनी विकास की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण अपने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए सड़कों पर उतर आए हैं। मामला मेसर्स अंबुजा सीमेंट्स लिमिटेड (अडानी ग्रुप) की प्रस्तावित पुरुंगा भूमिगत कोल खदान परियोजना से जुड़ा है, जिसे लेकर तीन ग्राम पंचायत — पुरंगा, सामरसिंघा और तेंदुमुड़ी  के लोग लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

इलाके के ग्रामीणों का कहना है कि यह परियोजना उनके जीवन, पर्यावरण और भविष्य के लिए खतरा है। कोल ब्लॉक के नाम पर गांवों की शांत वादियों में अशांति का माहौल बन गया है। हम अपने जल, जंगल और जमीन किसी को नहीं देंगे,” — यह नारा अब धरमजयगढ़ के गांव-गांव में गूंज रहा है।

सर्वसम्मति से विरोध का प्रस्ताव

ग्राम तेंदुमुड़ी में आयोजित विशेष ग्रामसभा में ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से अडानी समूह की कोल परियोजना को खारिज करते हुए जनसुनवाई निरस्त करने का प्रस्ताव पारित किया था। ग्रामीणों ने कहा कि यह परियोजना आने वाली पीढ़ियों के अस्तित्व पर संकट बन सकती है। इसके बाद 22 अक्टूबर को ग्रामीण प्रतिनिधियों ने जिला कलेक्टर रायगढ़ को ज्ञापन सौंपते हुए 11 नवंबर को प्रस्तावित जनसुनवाई को निरस्त करने की मांग की।

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प्रशासनिक स्तर पर बैठक, कंपनी ने दी सफाई

इस विरोध के बीच 23 अक्टूबर को जनपद पंचायत धरमजयगढ़ सभागार में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) की अध्यक्षता में एक आवश्यक बैठक आयोजित की गई।
इस बैठक में अडानी कंपनी के अधिकारी, पंचायत प्रतिनिधि, बीडीसी सदस्य और स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। बैठक के दौरान ग्रामीणों ने परियोजना से संभावित पर्यावरणीय और सामाजिक नुकसान को लेकर कई सवाल उठाए। ग्रामीणों ने पूछा कि क्या भूमिगत खनन से जल स्रोत सूख नहीं जाएंगे?क्या वनों की जड़ें और जैव-विविधता पर असर नहीं पड़ेगा? क्या परियोजना के बहाने भविष्य में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू नहीं होगी?

इन सवालों के जवाब में अडानी कंपनी के अधिकारियों ने अपना पक्ष रखते हुए कहा  परियोजना पूरी तरह भूमिगत है, जिससे सतह पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। कृषि भूमि, जल स्रोत और वन क्षेत्र सुरक्षित रहेंगे। जलस्तर में गिरावट की बात भ्रांति मात्र है। भूमि अधिग्रहण या विस्थापन की कोई आवश्यकता नहीं होगी। परियोजना से लगभग 1200 स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। कंपनी क्षेत्रीय विकास और पेशा अधिनियम के प्रावधानों का पालन करेगी।

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अधिकारियों के अनुसार, कुल 869.025 हेक्टेयर भूमि में से मात्र 17 हेक्टेयर क्षेत्र का उपयोग आधारभूत ढांचे के लिए किया जाएगा।

ग्रामीणों में और बढ़ा आक्रोश

हालांकि, कंपनी के इन आश्वासनों से ग्रामीण संतुष्ट नहीं हुए। बैठक के बाद तीनों ग्राम पंचायतों के लोगों ने एकजुट होकर विशाल ग्रामसभा की। इस ग्रामसभा में ग्रामीणों ने कहा कि कंपनी के दावे झूठे और दिखावटी हैं। उनका कहना है कि भूमिगत खनन से जलस्तर प्रभावित होगा, जिससे खेती, पेयजल और जंगल पर गहरा असर पड़ेगा।

जनसुनवाई को लेकर टकराव की स्थिति

वहीं अब 11 नवंबर को प्रस्तावित जनसुनवाई को लेकर टकराव की स्थिति बनती दिख रही है। ग्रामीणों ने साफ कहा है कि वे किसी भी स्थिति में जनसुनवाई नहीं होने देंगे। वहीं प्रशासनिक तंत्र तैयारी में जुटा है।

धरमजयगढ़ प्रशासन परियोजना को विकास की दृष्टि से जरूरी बता रहा है। उsकाउसका कहना है कि कोल ब्लॉक से क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा, रोजगार के अवसर मिलेंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा।

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विरोध को विधायक और स्थानीय नेताओं का समर्थन

इस पूरे घटनाक्रम में क्षेत्रीय विधायक लालजीत राठिया तथा कई अन्य जनप्रतिनिधि भी ग्रामीणों के समर्थन में उतर आए हैं। विधायक राठिया का कहना है कि जब तक ग्रामीणों की सहमति नहीं होगी, कोई भी परियोजना जनता पर थोपना लोकतंत्र के खिलाफ है। विकास वही सच्चा है जिसमें जनता की मर्जी शामिल हो।