टीआरपी डेस्क। आस्था, श्रद्धा और आत्मबल के प्रतीक छठ महापर्व का आज समापन हो गया। 25 अक्टूबर को नहाय-खाय से आरंभ हुआ यह पर्व आज ऊषा अर्घ्य के साथ संपन्न हुआ। व्रती महिलाओं ने 36 घंटे के निर्जला व्रत के बाद भगवान सूर्य को जल अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि और संतान की दीर्घायु की कामना की। देश के विभिन्न हिस्सों में श्रद्धालुओं ने अपने-अपने तरीके से इस पर्व को मनाया।
बिहार में लोक आस्था का यह पर्व सबसे अधिक उत्साह के साथ मनाया गया। कटिहार सहित विभिन्न जिलों में भक्तिमय वातावरण रहा। घाटों और कृत्रिम जलाशयों पर साज-सज्जा और रोशनी की विशेष व्यवस्था की गई। पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं ने अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी 1 अणे मार्ग स्थित अपने आवास पर परिवार के साथ छठ पूजा की और राज्य में सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की। साथ ही उन्होंने छठ की परंपरा को सहेजते हुए मतदान के प्रति लोगों को जागरूक करने का संदेश भी दिया।

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ घाटों पर उमड़ी। नागेश्वरनाथ धाम सरोवर सहित विभिन्न तालाबों और नदियों के किनारे महिलाओं ने सूप, फल, गन्ना और पूजा सामग्री के साथ सूर्य उपासना की। प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए।

मुरादाबाद में भी छठ महापर्व के अवसर पर मंडल आयुक्त आंजनेय कुमार सिंह और विधायक रितेश गुप्ता ने छठ घाट पर पूजा-अर्चना कर श्रद्धालुओं से मुलाकात की। शहर के घाटों पर संध्या अर्घ्य का अनुष्ठान श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। हजारों श्रद्धालु डूबते सूर्य को अर्घ्य देने पहुंचे, जिससे पूरा वातावरण छठी मैया के गीतों और जयकारों से गूंज उठा।

मध्य प्रदेश में भी छठ पर्व का आयोजन धूमधाम से हुआ। इंदौर में पूर्वोत्तर क्षेत्र के लोगों ने सामूहिक रूप से सूर्य उपासना की। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी छठ घाट पर पहुंचकर सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया और व्रती महिलाओं से मुलाकात की। महिलाओं ने छठ पूजा के महत्व और इसके धार्मिक-सांस्कृतिक पहलुओं को साझा किया।

देशभर में छठ महापर्व के अवसर पर गंगा, नदियों, तालाबों और कृत्रिम घाटों पर आस्था का सैलाब उमड़ा रहा। सूर्यास्त से लेकर सूर्योदय तक श्रद्धा, भक्ति और लोकगीतों से भरा यह पर्व भारतीय संस्कृति की जीवंत परंपरा का प्रतीक बनकर एक बार फिर लोगों को आस्था से जोड़े रखने वाला साबित हुआ।


