रायपुर। सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद अब भी लोगों के मोबाईल पर स्पैम कॉल आ रहे हैं। दूरसंचार नियामक ट्राई ने कहा है कि मोबाइल फोन पर केवल नंबर ब्लॉक करने से स्पैम कॉल और धोखाधड़ी वाले संदेशों पर रोक नहीं लगती है। इसके लिए ग्राहकों को ‘ट्राई डीएनडी ऐप’ के जरिये ही स्पैम की शिकायतें दर्ज करानी चाहिए।

‘ट्राई डीएनडी ऐप’ भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) का आधिकारिक मंच है, जिसके जरिये मोबाइल उपभोक्ता स्पैम कॉल और स्पैम संदेश की शिकायतें दर्ज कर सकते हैं। यहां पर डीएनडी का मतलब ‘डू नॉट डिस्टर्ब’ से है।

21 लाख से भी अधिक फोन काटे गए

ट्राई ने बयान में कहा कि उपभोक्ताओं की शिकायतों के आधार पर स्पैम और फर्जीवाड़े वाले संदेश भेजने पर अब तक 21 लाख से अधिक मोबाइल नंबर काटे जा चुके हैं और लगभग एक लाख इकाइयों को काली सूची में डाला जा चुका है।

नियामक ने कहा, ‘‘ट्राई ने एक परामर्श जारी किया है जिसमें लोगों से ट्राई डीएनडी ऐप के जरिये स्पैम कॉल/ फर्जी संदेश की सूचना देने की अपील की गई है। इसमें बताया गया है कि सिर्फ अपने फोन पर नंबर ब्लॉक करने से स्पैम नहीं रुकता है।’’ सामूहिक शिकायतों से ऐसे नंबरों की पहचान कर कार्रवाई करना संभव होता है।

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नए नंबर का इस्तेमाल करने लगते हैं कॉलर्स

ट्राई के मुताबिक, फोन में नंबर ब्लॉक करने का मतलब सिर्फ यह है कि वह कॉल आपके फोन पर नहीं आएगी लेकिन फर्जीवाड़ा करने वाला उसी या नए नंबरों से बाकी लोगों को कॉल करते रहते हैं।

ट्राई ने कहा कि डीएनडी ऐप के जरिये दर्ज की गई शिकायतें दूरसंचार कंपनियों और नियामक को संदिग्ध नंबरों का पता लगाने, उनकी जांच करने और स्थायी रूप से डिस्कनेक्ट करने में मदद करती हैं।