टीआरपी डेस्क। हर साल नवंबर का चौथा शुक्रवार पूरी दुनिया के लिए सबसे बड़ा शॉपिंग त्योहार बन चुका है , जिसे हम ब्लैक फ्राइडे सेल के रूप में जानते हैं। अमेरिका में थैंक्सगिविंग के ठीक अगले दिन पड़ने वाला यह शुक्रवार अब भारत, ब्रिटेन, कनाडा, जर्मनी, दुबई से लेकर ब्राजील तक मेगा सेल का पर्याय है।

ब्लैक फ्राइडे का मतलब क्या है?

आज के समय में ब्लैक फ्राइडे का मतलब है,  थैंक्सगिविंग के अगले दिन आने वाला वह बड़ा शॉपिंग डे, जब दुनिया भर के स्टोर और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म 50 से 90 प्रतिशत तक की भारी छूट देते हैं इसी कारण इसे साल का सबसे बड़ा रिटेल फेस्टिवल माना जाता है। लेकिन “ब्लैक फ्राइडे” नाम कैसे पड़ा?

रिटेल उद्योग में कहा जाता है कि दुकानों के अकाउंट्स पूरे साल लाल (red) यानी घाटे में रहते हैं। थैंक्सगिविंग के बाद इस एक दिन की जबरदस्त सेल से दुकानों को इतना मुनाफा होता है कि उनके अकाउंट्स *काले* (black) में आ जाते हैं, यानी: लाल से काले में जाना = घाटे से मुनाफे में पहुंचना, इसलिए इस दिन को ब्लैक फ्राइडे कहा जाने लगा। यह आज का आधिकारिक, प्रचारित और दुनिया भर में स्वीकृत अर्थ है।

दो अलग-अलग कहानियां

कैसे हुई ब्लैड फ्राइडे सेल की शुरुआत ? और इसका इतिहास इसे लेकर लोगों की अलग-अलग राय है। लोगों ने जब ब्लैक फ्राइडे सेल को लेकर जानने की इच्छा जाहिर की तो उन्हें इसकी अलग-अलग कहानी पढ़ने को मिली, पहली कहानी अमेरिका से जुड़ी हुई है। जिसमें 1869 के वित्तीय संकट का जिक्र है। 24 सितंबर 1869 को अमेरिकी वित्तीय व्यापारी जे गॉल्ड और जिम फिस्क ने सोने के बाजार पर कब्जा करने की साजिश रची। लेकिन, उनकी योजना सफल होने के बजाय फेल हो गई। जिसका असर शेयर बाजार भी पड़ा। शेयर बाजार बुरी तरह से धराशायी हो गया। दिन था शुक्रवार। इसलिए शुक्रवार को पहली इतिहास में “ब्लैक फ्राइडे” कहा गया।

दूसरी कहानी : फिलाडेल्फिया से जुड़ी हुई है। 1950-60 के दशक में थैंक्सगिविंग के अगले दिन शहर में उपनगरीय खरीदारों और पर्यटकों की भारी भीड़, ट्रैफिक जाम, चोरी की घटनाएँ और पुलिस की अतिरिक्त ड्यूटी से त्रस्त पुलिस अधिकारियों ने इसे “ब्लैक फ्राइडे” नाम दिया। रिटेल कर्मचारी भी इसे सबसे कष्टप्रद कार्यदिवस मानते थे।

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अमेरिकी रिटेलर्स ने कैसे पलट दी कहानी

1980 के दशक में अमेरिकी रिटेलर्स ने कहानी पलट दी।  पूरे साल घाटे (In The Red) में रहने वाली दुकानों के खाते इस दिन मुनाफे (“In The Black”) में बदलते थे। “रेड टू ब्लैक” की यह मार्केटिंग कहानी इतनी प्रभावी रही कि नकारात्मक इतिहास भुला दिया गया और ब्लैक फ्राइडे दुनिया का सबसे बड़ा शॉपिंग डे बन गया।

आज का महत्व

– क्रिसमस-नववर्ष शॉपिंग सीजन की आधिकारिक शुरुआत। 

– अमेरिका में एक दिन में 40 बिलियन डॉलर से अधिक की बिक्री (2024 में ऑनलाइन अकेले 9.8 बिलियन डॉलर)। 

– भारत में फ्लिपकार्ट का बिग बिलियन डेज़, अमेज़न का ग्रेट इंडियन फेस्टिवल  सब ब्लैक फ्राइडे की नकल हैं। 

– अब यह एक दिन नहीं, पूरा हफ्ता या महीना (ब्लैक फ्राइडे वीक, साइबर वीक) बन चुका है। 

– साइबर मंडे (अगला सोमवार) इसका ऑनलाइन वर्जन है।

ब्लैक फ्राइडे के प्रमुख विवाद और आलोचनाएं

ब्लैक फ्राइडे दुनिया का सबसे बड़ा शॉपिंग उत्सव है, लेकिन यह कई गंभीर विवादों से घिरा रहा है। भीड़भाड़ वाली हिंसा से लेकर पर्यावरणीय नुकसान और श्रमिक शोषण तक, ये आलोचनाएँ उपभोक्तावाद की अंधी दौड़ पर सवाल उठाती हैं। नीचे प्रमुख विवाद विस्तार से दिए गए हैं:

1. दुकानों के बाहर भगदड़, मारपीट और हिंसा

ब्लैक फ्राइडे की भारी छूट के चक्कर में दुकानों के बाहर भगदड़ मच जाती है, जो अक्सर मारपीट, गोलीबारी और मौतों तक पहुँच जाती है।

•           2008 में न्यूयॉर्क के वॉलमार्ट में 2000 लोगों की भीड़ ने दरवाजे तोड़ दिए और कर्मचारी जेडिम्यताई डामौर को कुचलकर मार डाला।

•           2006 से 2018 तक कुल 11 मौतें और 100 से अधिक चोटें दर्ज हुईं, जिनमें शूटिंग और ट्रैंपलिंग प्रमुख हैं।

•           blackfridaydeathcount.com जैसी साइटें इन घटनाओं का हिसाब रखती हैं। यह हिंसा मुख्य रूप से अमेरिका में होती है, लेकिन ब्रिटेन और अन्य देशों में भी मारपीट की खबरें आम हैं।

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2. कर्मचारियों को थैंक्सगिविंग पर परिवार से दूर रहना

अमेरिका में थैंक्सगिविंग परिवार के साथ मनाया जाता है, लेकिन ब्लैक फ्राइडे सेल के लिए दुकानें शाम से खुल जाती हैं, जिससे कर्मचारियों को छुट्टी नहीं मिलती।

•           सालाना प्रदर्शन होते हैं, जैसे “We Ain’t Buying It” और “Mass Blackout” बॉयकॉट, जो परिवार के समय की मांग करते हैं।

•           2025 में भी कई ग्रुप्स ने थैंक्सगिविंग से साइबर मंडे तक बॉयकॉट किया, ताकि कर्मचारी परिवार के साथ रह सकें। यह आलोचना रिटेल कर्मचारियों की लंबी शिफ्ट और कम वेतन पर केंद्रित है।

3. अनावश्यक खरीदारी से क्रेडिट कार्ड कर्ज और जनवरी में पछतावा

ब्लैक फ्राइडे पर इंपल्स बायिंग आम है, जो क्रेडिट कार्ड डेब्ट बढ़ाती है।

•           सर्वे में 47% शॉपर डेब्ट में जाते हैं, और जनवरी में बिल देखकर पछतावा होता है।

•           55% डेब्ट वाले शॉपर अपना कार्ड मैक्स आउट कर लेते हैं।

•           BNPL (बाय नाउ पे लेटर) से भी कर्ज बढ़ता है, जिससे लाखों लोग डेब्ट कलेक्टर्स के शिकार बनते हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बजट बनाकर ही खरीदारी करें।

ब्लैक फ्राइडे से उत्पादन, डिलीवरी और रिटर्न बढ़ते हैं, जो पर्यावरण को भारी नुकसान पहुँचाते हैं।

•           रिटेल सेक्टर वैश्विक कार्बन उत्सर्जन का 25% योगदान देता है।

•           पैकेजिंग से 321,596 मीट्रिक टन प्लास्टिक कचरा (अकेले अमेज़न 2022 में)।

•           रिटर्न की कार्बन कॉस्ट डिलीवरी से 30% अधिक, जो 420,000 मीट्रिक टन GHG उत्सर्जन के बराबर।

•           डिलीवरी वाहनों से उत्सर्जन बढ़ता है, और 80% खरीदे सामान बेकार हो जाते हैं।

2025 में ब्लैक फ्राइडे पर भारत में अमेज़न वेयरहाउस कर्मचारियों ने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया।

•           दिल्ली, कोलकाता, मुंबई सहित 20 से दज्यॉ शहरों में हजारों कर्मचारी सड़कों पर उतरे, बेहतर वेतन, सुरक्षित कार्यस्थल और गर्मी से सुरक्षा की मांग की।

•           “Make Amazon Pay” कैंपेन के तहत न्यू दिल्ली में 200 कर्मचारियों ने रैली की।

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•           गर्मी में वेयरहाउस “भट्टी” जैसे हो जाते हैं, लोग बेहोश हो जाते हैं, लेकिन टारगेट नहीं रुकते। यह वैश्विक प्रदर्शन का हिस्सा था, जिसमें 30+ देश शामिल थे।

मिथक जो गलत साबित हुए

– 1800 के दशक में दासों की छूट पर बिक्री, लेकिन, इसका कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं। 

– पूरे साल पहला मुनाफा इसी दिन होता है , ज्यादातर बड़ी कंपनियाँ पहले ही मुनाफे में होती हैं; यह सिर्फ मार्केटिंग मिथक है। फिर भी हर साल रिकॉर्ड टूटते हैं। 

ब्लैक फ्राइडे अब सिर्फ एक सेल नहीं  यह ग्लोबल उपभोक्तावाद, डिजिटल रिटेल और मार्केटिंग की ताकत का सबसे चमकदार और विवादास्पद प्रतीक बन चुका है।

क्यों मायने रखता है ब्लैक फ्राइडे?

ब्लैक फ्राइडे को पहले दुकानों में भारी भीड़ और लंबी कतारों के लिए जाना जाता था, लेकिन समय बदलने के साथ इसकी तस्वीर पूरी तरह डिजिटल हो गई है। अब इस दिन सबसे अधिक कारोबार ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर दर्ज किया जा रहा है। वेबसाइटों पर ट्रैफिक इतना बढ़ जाता है कि कई बार सर्वर तक क्रैश हो जाते हैं।

उपभोक्ताओं के लिए ब्लैक फ्राइडे ऐसे अवसर के रूप में उभरा है, जब महंगे से महंगे उत्पाद ऐतिहासिक छूट पर खरीदे जा सकते हैं। विभिन्न ब्रांड इस दौरान भारी छूट देकर ग्राहक आकर्षित करते हैं, जिससे गिफ्ट या प्रीमियम प्रोडक्ट्स भी किफायती कीमतों पर उपलब्ध हो जाते हैं।

वहीं रिटेलर्स के लिए यह साल की सबसे बड़ी कमाई का दिन माना जाता है। कई कंपनियां इस एक दिन में करोड़ों की बिक्री दर्ज कर लेती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ब्लैक फ्राइडे अब सिर्फ एक शॉपिंग फेस्टिवल नहीं रहा, बल्कि यह आर्थिक, सामाजिक और मार्केटिंग ट्रेंड का प्रमुख संकेत बन चुका है।

यह ट्रेंड बताता है कि ग्लोबलाइजेशन और डिजिटल रिटेल ने उपभोक्ताओं की खरीदारी की आदतों को किस तरह बदला है। फिजिकल स्टोर्स की भीड़ अब वर्चुअल प्लेटफॉर्म्स की ओर शिफ्ट हो चुकी है, जिससे ऑनलाइन शॉपिंग का दायरा लगातार विस्तार पा रहा है।