टीआरपी डेस्क। आज की भागदौड़ भरी लाइफस्टाइल में देर रात तक जागना एक साइलेंट किलर बनता जा रहा है, जो सीधे आपके दिल की सेहत पर हमला करता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो नींद की कमी और बिगड़ा हुआ स्लीप पैटर्न हार्ट अटैक और हाई ब्लड प्रेशर जैसी गंभीर बीमारियों का मुख्य कारण बन रहा है।
क्यों महत्वपूर्ण है : छत्तीसगढ़ के शहरी इलाकों में नाइट शिफ्ट और देर रात तक मोबाइल के इस्तेमाल से युवाओं में दिल की बीमारियाँ बढ़ी हैं। राज्य के स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी हालिया रुझान बताते हैं कि रायपुर और भिलाई जैसे शहरों में 30 से 45 वर्ष की आयु के लोगों में हृदय संबंधी समस्याएँ अधिक देखी जा रही हैं, जिसका सीधा संबंध खराब लाइफस्टाइल से है।
नींद और दिल का गहरा कनेक्शन
जब आप सोते हैं, तो आपका शरीर और दिल रिकवरी मोड में होते हैं। नींद के दौरान हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर प्राकृतिक रूप से कम हो जाते हैं, जिससे हृदय की मांसपेशियों को आराम मिलता है। यदि आप लगातार देर रात तक जागते हैं, तो दिल को यह आराम नहीं मिल पाता, जिससे लंबे समय में कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम कमजोर होने लगता है।
ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल पर सीधा प्रहार देर रात तक जागने से शरीर में कोर्टिसोल (स्ट्रेस हार्मोन) का स्तर बढ़ जाता है। यह बढ़ा हुआ तनाव सीधे तौर पर ब्लड प्रेशर को हाई करता है और शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL) को बढ़ाता है। यही वो कारक हैं जो धमनियों में ब्लॉकेज पैदा कर दिल के दौरे की वजह बनते हैं।
मोटापा और डायबिटीज का बढ़ता जोखिम
नींद पूरी न होने पर शरीर में भूख को नियंत्रित करने वाले हार्मोन असंतुलित हो जाते हैं। इससे अक्सर रात के समय जंक फूड की क्रेविंग होती है, जिससे मोटापा और डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है। छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों की ओर शिफ्ट हुए युवाओं में यह पैटर्न तेजी से देखा जा रहा है।
दिल की धड़कन का बिगड़ना (एरिदमिया)
विशेषज्ञों के अनुसार, शरीर की बायोलॉजिकल क्लॉक यानी सर्कैडियन रिदम बिगड़ने से दिल की धड़कन अनियमित हो सकती है। इसे मेडिकल भाषा में एरिदमिया कहा जाता है। यह स्थिति कई बार अचानक कार्डियक अरेस्ट का कारण भी बन सकती है।


