टीआरपी। आम आदमी पार्टी (AAP) ने छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार पर किसान विरोधी होने का गंभीर आरोप लगाया है। प्रदेश महासचिव वदूद आलम ने दावा किया कि सरकारी नीतियों और पोर्टल की तकनीकी खामियों के कारण प्रदेश के 7 लाख किसान अपना धान बेचने से वंचित रह गए हैं, जिसके विरोध में पार्टी 14 फरवरी से पूरे प्रदेश में विधानसभा स्तरीय “किसान न्याय जनसभा” शुरू करने जा रही है।
छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था का आधार खेती है। धान खरीदी न होने और खाद (पोटाश-यूरिया) के दामों में वृद्धि या वजन में कटौती का सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की क्रय शक्ति पर पड़ता है। ‘आप’ का यह आंदोलन चुनावी समीकरणों और ग्रामीण असंतोष को नई दिशा दे सकता है।
धान खरीदी में ‘षडयंत्र’ और आर्थिक संकट का आरोप
पत्रकार वार्ता में वदूद आलम ने कहा कि सरकार ने इस वर्ष लगभग 23 लाख टन धान नहीं खरीदा, जिसकी कीमत 7130 करोड़ रुपये है। एग्रीस्टेक पोर्टल की परेशानियों और रकबा समर्पण के कारण 5 लाख से अधिक किसान प्रभावित हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि टोकन न कटने और धान न बिकने के तनाव में प्रदेश में किसानों द्वारा आत्महत्या के प्रयास जैसी दुखद घटनाएं भी सामने आई हैं।
यूरिया और पोटाश के दामों पर घेराबंदी
प्रदेश अध्यक्ष (कर्मचारी विंग) विजय कुमार झा ने बताया कि पोटाश के दाम बढ़ा दिए गए हैं और यूरिया की बोरी का वजन 50 किलो से घटाकर अब 40 किलो कर दिया गया है, जबकि कीमत 267 रुपये ही रखी गई है। इसके अलावा, कोऑपरेटिव बैंकों से पैसा निकालने के लिए किसानों को सुबह 6 बजे से लाइन में लगना पड़ रहा है और एक बार में केवल 25 हजार रुपये ही दिए जा रहे हैं।
‘किसान न्याय जनसभा’ के जरिए संवाद
प्रदेश सचिव अनुषा जोसेफ, मीडिया प्रभारी मिहिर कुर्मी, और इमरान खान ने संयुक्त रूप से बताया कि 14 फरवरी 2026 से शुरू होने वाली जनसभाओं में स्थानीय किसानों से सीधा संवाद किया जाएगा। पार्टी केंद्र सरकार द्वारा अमेरिका के साथ की गई ‘ट्रेड डील’ का भी विरोध कर रही है, जिसे वे भारतीय कृषि व्यवस्था के लिए घातक बता रहे हैं।
- प्रभावित किसान: लगभग 7 लाख किसान धान बेचने से वंचित।
- आर्थिक नुकसान: 7130 करोड़ रुपये का धान नहीं खरीदा गया।
- यूरिया में कटौती: बैग का वजन 50 किलो से घटकर 40 किलो हुआ।
- अभियान: 14 फरवरी से प्रदेशव्यापी “किसान न्याय जनसभा” का आगाज।
आम आदमी पार्टी इन जनसभाओं के माध्यम से किसानों की समस्याओं का डेटा इकट्ठा करेगी और इसे प्रदेश स्तर पर बड़े आंदोलन का रूप देगी। यदि सरकार ने खाद की कीमतों और धान खरीदी की विसंगतियों पर ध्यान नहीं दिया, तो आने वाले दिनों में राजधानी रायपुर में बड़ा प्रदर्शन देखा जा सकता है।


