टीआरपी डेस्क। आज यानी 15 फरवरी 2026 को पूरा देश शिवमय हो गया है। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर तड़के सुबह से ही देशभर के शिवालयों में भक्तों का तांता लगा हुआ है। शास्त्रोक्त मान्यता है कि आज के दिन सच्ची श्रद्धा से किया गया जलाभिषेक जन्म-जन्मांतर के पापों को धो देता है। यदि आप भी आज महादेव की शरण में जा रहे हैं, तो यह जान लेना अत्यंत आवश्यक है कि पूजा और जल अर्पण का सबसे फलदायी समय कौन सा है।
सबसे खास: निशिता काल मुहूर्त (आज मध्यरात्रि)
महाशिवरात्रि की पूजा में ‘निशिता काल’ का महत्व सबसे अधिक है। माना जाता है कि इसी समय भगवान शिव निराकार से साकार रूप (लिंगोद्भव) में प्रकट हुए थे। 16 फरवरी की रात (आज आधी रात के बाद) 12:09 बजे से 01:01 बजे तक मुहूर्त रहेगा। इस 52 मिनट के दौरान किया गया मंत्र जप और अभिषेक करोड़ों गुना फल प्रदान करता है।
| प्रहर | शुरू होने का समय | समाप्त होने का समय |
| प्रथम प्रहर | आज शाम 06:11 बजे | रात 09:23 बजे |
| द्वितीय प्रहर | रात 09:23 बजे | मध्यरात्रि 12:35 बजे |
| तृतीय प्रहर | रात 12:35 बजे (16 Feb) | तड़के 03:47 बजे |
| चतुर्थ प्रहर | सुबह 03:47 बजे (16 Feb) | सूर्योदय 06:59 बजे |
जलाभिषेक की सही विधि और सामग्री
शास्त्रों के अनुसार, शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय मुख उत्तर दिशा की ओर होना श्रेष्ठ माना जाता है। तांबे के पात्र से जल की पतली धारा चढ़ाते हुए ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करें। इसके बाद पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) अर्पित करें। महादेव को प्रसन्न करने के लिए बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद चंदन, भस्म और आक के फूल जरूर चढ़ाएं। गृहस्थ जनों के लिए शाम के प्रथम प्रहर की पूजा सुख-शांति के लिए सर्वोत्तम मानी गई है। शिवलिंग पर कभी भी शंख से जल न चढ़ाएं और न ही तुलसी के पत्ते अर्पित करें।


